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“असली चुदाई का मजा मुझे पापा ने दिया”-3

आपनें पिछले भाग में पढ़ा कि मैं अपनी बहू की चुदाई के लिए बेचैन हो रहा था और आधी रात में नंगा ही उसके कमरे की ओर बढ़ा|
अब आगे….

मुझे एक अस्पष्ट सा साया अपनी ओर आते दिखा! उसका गोरा जिस्म उस अंधेरे में भी अपनी आभा बिखेर रहा था| आँखें गड़ा कर देखा तो… बहूरानी! हाँ अदिति ही तो थी|

मेरी बांहें खुद ब खुद उठ गईं उधर उसकी बांहें भी साथ साथ उठीं और हम दोनों एक दूजे के आगोश में समा गए| बहूरानी के तन पर कोई वस्त्र नहीं था! एकदम मादरजात नंगी! उसकी जुल्फें खुली हुई कन्धों पर बिखरीं थीं| उसके नंगे बदन की तपिश मुझे जैसे झुलसानें लगी और मेरे हाथ उसके नंगे जिस्म को सब जगह सहलानें लगे| मैंनें उसके दोनों दूध मुट्ठियों में दबोच लिए|
इधर मेरा लंड उसकी चूत का आभास पा कर और भी तन गया और उसकी जाँघों से टकरानें लगा|

पापा जी! आई लव यू! बहू रानी भावावेश में बोली और मेरा लंड पकड़ कर सहलानें लगी साथ में मेरी गर्दन में एक हाथ डाल कर मेरा सिर झुका के अपनें होंठ मेरे होंठों से मिला कर चुम्बन करनें लगी|
आई लव यू टू अदिति बेटा! मैंनें कहा और उसका मस्तक चूम लिया और एक हाथ नीचे ले जा कर उसकी चूत सहलानें लगा|
बहूरानी की चूत बहुत गीली होकर रस बहा रही थी यहाँ तक कि उसकी झांटें भी भीग गईं थीं|

उस नीम अँधेरे ड्राइंग रूम में दो जिस्म आपस में लिपटे हुए यूं ही चूमा चाटी करते रहे|

अचानक बहूरानी नें मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया और उसे दबा कर अपनी चूत रगड़नें लगी| मैंनें भी उसकी चूत मुट्ठी में भर के मसल दी| मेरे ऐसा करते ही बहूरानी नीचे घुटनों के बल बैठ गई और मेरा लंड अपनें मुंह में भर लिया! लंड को कुछ देर चाटनें चूसनें के बाद वो नंगे फर्श पर ही लेट गई और मेरा हाथ पकड़ कर अपनें ऊपर खींच लिया! फिर अपनें दोनों पैर ऊपर उठा कर मेरी कमर में लपेट कर कस दिए और मेरे कंधे में जोर से काट लिया|
बहुत उत्तेजित थी वो!

वक़्त की नजाकत को समझते हुए मैंनें उसका निचला होंठ अपनें होंठों में दबा लिया और चूसनें लगा| उधर बहूरानी नें एक हाथ नीचे ले जा कर मेरे लंड को पकड़ के सुपारा अपनी रिसती चूत के मुहानें पर रख के लंड को चूत का रास्ता दिखाया|

अब आ जाओ पापा जी जल्दी से| समा जाओ अपनी अदिति की प्यासी चूत में! बहूरानी अपनी बांहों से मुझे कसते हुए बोली|
ये लो अदिति बेटा! मैंनें कहा और लंड को धकेल दिया उसकी चूत में… लंड उसकी चूत में फंसता हुआ कोई दो तीन अंगुल तक घुस के ठहर सा गया|
धीरे से पापा जी! बहुत बड़ा और मोटा लंड है आपका| आज कई महीनें बाद ले रही हूँ न! बहूरानी कुछ विचलित स्वर में बोली और अपनी टाँगें उठा के अपनें हाथों से पकड़ कर अच्छे से चौड़ी खोल दीं जिससे उसकी चूत और ऊपर उठ गई|

मैंनें बहूरानी की बात को अनसुना करते हुए लंड को थोड़ा सा आगे पीछे किया और फिर अपनें दांत भींच कर लंड को बाहर तक निकाल के जोरदार धक्का मार दिया| इस बार पूरा लंड जड़ तक घुस गया बहु की चूत में|

हाय राम मार डाला रे! आपको तो जरा भी दया नहीं आती अपनी बहू पे| ऐसे बेरहमी से घुसा दिया जैसे कोई बदला निकाल रहे हो मेरी चूत से! बहू रानी चिढ़ कर बोली|
बदला नहीं अदिति बेटा! ये तो लंड का प्यार है तेरी चूत के लिए! मैंनें उसे चूमते हुए समझाया|
रहनें दो पापा जी! देख लिया आपका प्यार| धीरे धीरे आराम से घुसाते तो क्या शान घट जाती आपके लंड की? पराई चीज पे दया थोड़ी ही न आती है किसी को!

बहू रानी की बात सुन के मुझे हंसी आ गई- अदिति बेटा! तेरी चूत पराई नहीं है मेरे लिए; पर मेरा लंड इसी स्टाइल में घुसता है चूत में!
मैंनें कहा|
चाहे किसी की जान ही निकल जाये आप तो अपनें स्टाइल में ही रहना| मम्मी जी को भी ऐसे ही सताते होगे आप?
बेटा! तेरी सासू माँ की चूत तो अब बुलन्द दरवाजे जैसी हो गई है! उसे कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे हाथ ही घुसा दो कोहनी तक!
तो मेरी चूत भी आप इंडियागेट या लालकिले जैसी बना दोगे इसी तरह बेरहमी से अपना मोटा लंड घुसा घुसा के? बहूरानी नें मुझे उलाहना दिया|
अरे नहीं अदिति बेटा! अभी तेरी उमर ही क्या है! तेईस चौबीस की होगी| अभी तेरी चूत तो यूं ही टाइट रहेगी सालों साल तक और किसी कुंवारी लड़की की कमसिन चूत की तरह मज़ा देती रहेगी मुझे| मैंनें बहूरानी को मक्खन लगाया और उसके निप्पल चुटकी में भर के उसका निचला होंठ चूसनें लगा|

हुम्म… चिकनी चुपड़ी बातें करवा लो आप से तो! बहूरानी बोलीं और मेरे चुम्बन का जवाब देनें लगी और उसकी दोनों बांहें अब मेरी गर्दन से लिपट गईं थीं| फिर बहूरानी नें अपनी जीभ मेरे मुंह में घुसा दी जिसे मैं चूसनें लगा| मेरा मुखरस बह बह के बहूरानी के मुंह में समानें लगा फिर बहूरानी नें मेरी जीभ अपनें मुंह में ले ली और जीभ से जीभ लड़ानें लगी|

पापा जी एक बात बताओ? बहूरानी नें चुम्बन तोड़ कर मुझसे कहा|
पूछो बेटा?
अभी आप मुझसे दूर ड्राइंग रूम में क्यों सोये थे?
अदिति बेटा! मैं सुबह से ही देख रहा था कि तुम मेरी नज़रों से बच रही थी! आंख झुका के बात कर रहीं थीं तो मुझे लगा कि हमारे बीच बन गए सेक्स के रिश्ते का तुम्हें पछतावा है और तुम अब वो सम्बन्ध फिर से नहीं बनाना चाहतीं! इसीलिए मैं अलग सो गया था|

अब तुम बताओ तुम्हारे मन में क्या चल रहा था? मैंनें कहा|
पापा जी! मैं शुरू से बताती हूँ पूरी बात| मैं शादी के समय भी बिल्कुल कोरी कुंवारी थी| आपके बेटे नें ही सुहागरात को मेरी योनि की सील तोड़ कर मेरा कौमार्य भंग किया था फिर उसके बाद आप मेरे जीवन में अचानक अनचाहे ही आ गए| गुड़िया ननद की शादी के बाद जब आप उस रात छत पर उस एकान्त कमरे में अकेले सो रहे थे और मैं आपके पास आपको अपना पति समझ के पूरे कपड़े उतार कर पूरी नंगी होकर आपके पास लेट गयी थी और आपको सम्भोग करनें के लिए मना रही थी! उकसा रही थी| लेकिन आप मुझसे बचनें का प्रयास कर रहे थे क्योंकि आप मुझे पहचान गए थे; लेकिन मैं आपको उस अंधेरे में नहीं पहचान पाई और आपका लिंग चूस चूस कर चाट चाट कर आपको मनाती रही उकसाती रही|

आप भी कहाँ तक सहन करते वो सब| विवश होकर आप मेरे ऊपर चढ़ गए और मुझमें बलपूर्वक मेरी इस में समा गए जैसे ही आपका विशाल लिंग मेरी प्यासी योनि में घुसा था! मैं समझ गयी थी कि मैं छली जा चुकी हूँ! कि मेरे साथ मेरा पति नहीं कोई और ही है क्योंकि आपके बेटे का लिंग आपसे बहुत छोटा और पतला सा है|
फिर आपनें जिस तूफानी ढंग से मुझे भोगा! मेरी योनि के कस बल निकाल के जो सम्भोग का चरम का सुख मुझे दिया! जो परम आनन्द आपनें दिया वो मेरे लिये अलौकिक और नया था; आपनें मेरे साथ प्रथम सम्भोग में ही मुझे कई कई बार डिस्चार्ज कराया; निहाल हो गयी थी मैं तो| आपके सुपुत्र तो चार पांच मिनट में ही सब निपटा के सो जाते थे| मैं भी यही जानती थी कि सेक्स ऐसा ही होता होगा| कभी सोचा या कल्पना तक नहीं की थी उस आनन्द के बारे में जिससे आपनें मुझे परिचित कराया! जिससे मैं तब तक अनजान थी|

फिर मैं आपसे बार बार सेक्स करनें को बेचैन! बेकरार रहनें लगी और उसके बाद हमारे बीच कई बार सम्बन्ध बनें|
पापा जी मेरे बदन को आज तक सिर्फ आपके बेटे नें और आपनें ही भोगा है किसी अन्य पुरुष नें कभी गलत नियत से छुआ भी नहीं है पहले| आपसे सम्बन्ध बननें के बाद जब मैं यहाँ आ गयी तो मुझे अपनें पति के साथ सहवास में वो आनन्द और तृप्ति नहीं मिली जो आप के साथ मिलन में मिली थी| मेरे संस्कार मुझे धिक्कारनें लगे! अपनें किये का पछतावा होनें लगा मुझे| मन पर एक बोझ सा रहनें लगा हमेशा! जैसे कोई महापाप हो गया हो मुझसे| आज आप आये तो सोच लिया था कि अब और नहीं करना वो सब; क्योंकि मन पे पड़ा बोझ बहुत तकलीफ देता है| बहूरानी बोली|

बहूरानी! फिर उसके बाद क्या हुआ तुम खुद नंगी होकर मेरे पास आ रही थी? मैंनें पूछा और अपनें लंड को उसकी चूत में दो तीन बार अन्दर बाहर किया| उसकी चूत अब खूब रसीली हो उठी थी और लंड बड़े आराम से मूव करनें लगा था|

हाँ पापा जी! आज जब हम डिनर करके उठ गए तो मैं भी घर का काम समेट कर! मन को पक्का करके लेट गयी थी कि अब आपके साथ वो सम्भोग का रिश्ता फिर से बिल्कुल नहीं बनाना है| लेकिन बहुत देर तक मुझे नींद नहीं आई| जो कुछ सोच रखा था वो सब उड़ गया दिमाग से… मैं वासना की अगन में जलनें लगी! मेरा रोम रोम आपको पुकारनें लगा और आपका प्यार पानें को! आपके लंड से चुदनें को मेरा बदन रह रह कर मचलनें लगा| मेरी चूत में बार बार तेज खुजली सी मचती और वो आपके लंड की आस लगाये पानी छोड़नें लगती! थोड़ी देर मैंनें अपनी उंगली भी चलाई इसमें पर अच्छा नहीं लगा| और मैं यूं ही छटपटाती रही बहुत देर तक|

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कई बार मन ही मन चाहा भी कि आप आओ और मुझ में जबरदस्ती समा जाओ; मैं ना ना करती रहूँ लेकिन आप मुझे रगड़ रगड़ के चोद डालो अपनें नीचे दबा के| लेकिन आप नहीं आये| फिर टाइम देखा तो दो बजनें वाले थे! मुझे लगा कि ऐसे तो जागते जागते मैं पागल ही हो जाऊँगी| अभी दस रातें साथ रहना है कोई कहाँ तक सहन करेगा ऐसे| अब जो होना है वो होनें दो यही सोच कर मैंनें अपनी नाइटी उतार फेंकी| ब्रा और पैंटी तो मैंनें पहनी ही नहीं थी और नंगी ही आ रही थी आपके पास| उधर से आप भी मेरे पास चले आ रहे थे बिना कपड़ों के… बहूरानी नें अपनी बात बताई|

बहूरानी के मुंह से चूत लंड शब्द सुनकर मुझे आनन्द आ गया|
बहूरानी जी! अब तो कोई पछतावा नहीं होगा न? मैंनें पूछा|
नहीं पापा जी! अब कुछ नहीं सोचना इस बारे में! जो हो रहा है होनें दो| आप तो जी भर के लो मेरी| जैसे चाहो वैसे चोदो मुझे! मैं पूरी तरह से आपकी हूँ| लाइफ इस फॉर लिविंग! बहूरानी खुश होकर बोली और मुझसे लिपट गयी|

तो लो फिर! मैंनें कहा और उसकी चूत में हल्के हल्के मध्यम रेंज के शॉट्स मारनें शुरू किये|
जल्दी ही बहूरानी अपनें चूतड़ उठा उठा के जवाब देनें लगीं|
उस अंधेरे में स्त्री पुरुष! नर मादा का सनातन खेल चरम पर पहुंचनें लगा| बहूरानी मेरे लंड से लय ताल मिलाती हुई चुदाई में दक्ष! पारंगत कामिनी की तरह अपनी चूत उठा उठा के मुझे देनें लगी| बहूरानी की चूत से निकलती फच फचफच फचाफच फचा फच की आवाजें! नंगे फर्श पर गिरते उसके कूल्हों की थप थप और उसके मुंह से निकलती कामुक कराहें ड्राइंग रूम में गूंजनें लगीं|

पापा जी! जोर से चोदो… हाँ ऐसे ही| अच्छे से कुचल दो मेरी चूत… आह… आह… क्या मस्त लंड है आपका… बहूरानी अपनी ही धुन में बहक रही थी अब|

अंधेरे कमरे में नंगे फर्श पर चूत मारनें का वो मेरा पहला अनुभव था; मेरे घुटनें और कोहनी फर्श पर रगड़नें से दर्द करनें लगे थे लेकिन चुदाई में भरपूर मज़ा भी आ रहा था| बहूरानी कमर उठा के मेरे धक्कों का प्रत्युत्तर देती और फिर उसके नितम्ब फर्श से टकराते तो अजीब सी पट पट की उत्तेजक ध्वनि वातावरण को और भी मादक बना देती|

इसी तरह चोदते चोदते मेरे घुटनें जवाब देनें लगे तो मैंनें बहूरानी को अपनें ऊपर ले लिया| अब चुदाई की कमान बहूरानी की चूत नें संभाल ली और वो उछल उछल के लंड लीलनें लगी| मैंनें उसके मम्मे पकड़ लिए और उन्हें दबानें लगा|

कोई दो मिनट बाद ही बहूरानी मेरे ऊपर से उतर गई- पापा जी! मेरे बस का नहीं है ऐसे| फर्श पर मेरे घुटनें छिल जायेंगे| आप मेरे ऊपर आ जाओ|
वो बोली|

अतः मैंनें फिर से बहूरानी को अपनें नीचे लिटा लिया और उसे पूरी स्पीड से चोदनें लगा| जल्दी ही हम दोनों मंजिल पर पहुंचनें लगे| बहूरानी मुझसे बेचैन होकर लिपटनें लगी; और अपनी चूत देर देर तक ऊपर उठाये रखते हुए लंड का मज़ा लेनें लगी| जल्दी ही हम दोनों एक साथ झड़नें लगे| बहूरानी नें अपनें नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए और टाँगे मेरी कमर में लपेट कर कस दीं| मेरे लंड से रस की पिचकारियां छूट रहीं थीं तो उधर बहूरानी की चूत भी सुकड़-फैल कर मेरे लंड को निचोड़ रही थी|

थोड़ी देर बाद ही बहूरानी का भुज बंधन शिथिल पड़ गया साथ ही उसकी चूत सिकुड़ गई जिससे मेरा लंड फिसल के बाहर निकल आया|
थैंक्स पापा जी! बहुत दिनों बाद आज मैं तृप्त हुई| वो मुझे चूमते हुए बोली|

क्यों! मेरा बेटा तुझे पूरा मज़ा नहीं देता क्या?
वो भी देते हैं; लेकिन आपके मूसल जैसे लंड की ठोकरें खानें में मेरी चूत को जो आनन्द और तृप्ति मिलती है वो अलग ही होती है! उसका कोई मुकाबला नहीं| आपका बेटा तो ऐसे संभल संभल कर करता है कि कहीं चूत को चोट न लग जाए! उसे पता ही नहीं कि चूत को जितना बेरहमी से ‘मारो’ वो उतनी ही खुश होती है|
हहाहा! बहूरानी वो धीरे धीरे सीख जाएगा| सेक्स के टाइम तुम उसे बताया करो कि तुम्हें किस तरह मज़ा आता है|

ठीक है पापा जी! अच्छा चलो अब सो जाओ| साढ़े तीन से ऊपर ही बजनें वाले होंगे पूरी रात ही निकल गयी जागते जागते बहू रानी बोली|
अभी थोड़ी देर बाद सोयेंगे| आज अंधेरे में चुदाई हो गई! तेरी चूत के दीदार तो हुए ही नहीं अभी तक| बत्ती जला के अपनी चूत के दर्शन तो करा दे! जरा दिखा तो सही; बहुत दिन हो गए देखे हुए! मैं बोला|

पापा जी! कितनी बार तो देख चुके हो मेरी चूत को! चाट भी चुके हो| अब तो आपको ये दो दिन बाद बुधवार को ही मिलेगी|
ऐसा क्यों? कल और परसों क्यों नहीं दोगी?
पापा जी! अब सुबह होनें वाली है| दिन निकलते ही सोमवार शुरू हो जाएगा| सोमवार को मेरा व्रत होता है और मंगल को आपका| अब तो बुधवार को ही दूंगी मैं!
चलो ठीक है| लेकिन अभी एक बार दिखा तो सही अपनी चूत! मैंनें जिद की|

बहूरानी उठी और लाइट जला दी! पूरे ड्राइंग रूम में तेज रोशनी फैल गयी| उस दिन महीनों बाद बहूरानी को पूरी नंगी देखा| कुछ भी तो नहीं बदली थी वो| वही रंग रूप! वही तनें हुए मम्में! केले के तनें जैसी चिकनी जांघे और उनके बीच काली झांटों में छुपी उसकी गुलाबी चूत|

मैंनें बहूरानी को पकड़ कर सोफे पर बैठा लिया और उसका एक पैर अपनी गोद में रखा और दूसरा सोफे पर ऊपर फैला दिया जिससे उसकी चूत खुल के सामनें आ गयी| मैंनें झुक के देखा और चूम लिया चूत को… चूत में से मेरे वीर्य और उसके रज का मिश्रण धीरे धीरे चू रहा था जिसे बहूरानी नें पास रखी नैपकिन से पौंछ दिया|

ये झांटें क्यों नहीं साफ़ करती तू? मैंनें पूछा|
पापा जी! ये काम तो आपका बेटा करता है मेरे लिए हमेशा| अब आपको करना पड़ेगा| परसों आप नाई बन जाना मेरे लिए और शेव कर देना मेरी चूत| कर दोगे न पापा जी? बहूरानी नें पूछा|
हाँ! बेटा जरूर| तेरी सासू माँ की चूत भी तो मैं ही शेव करता हूँ; तेरी भी कर दूंगा| चूत की झांटें बनानें में तो मुझे ख़ास मज़ा आता है| मैं हंस कर बोला|

ठीक है अब जानें दो! मुझे फर्श साफ़ कर दूं| देखो कितना गीला हो रहा है
तुम्हारी चूत नें ही तो गीला किया है इसे| मैंनें हंसी की|
अच्छा … आपका लंड तो बड़ा सीधा है न| उसमें से तो कुछ निकला ही न होगा! है ना?

बहूरानी ऐसे बोलती हुई किचन में गयी और पौंछा लाकर फर्श साफ़ करनें लगी| मैं नंगा ही दीवान पर लेट गया और सोनें लगा|
पापा जी! ऐसे मत सोओ कुछ पहन लो| अभी सात बजे काम वाली मेड आ जायेगी! अच्छा नहीं लगेगा|
ठीक है बेटा! मैंनें कहा और चड्ढी पहन कर टी शर्ट और लोअर पहन लिया|

फिर कब नींद आ गयी पता ही न चला|

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