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“असली चुदाई का मजा पापा ने दिया”-6

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आप मेरी पुत्रवधू के साथ

गांड मराई के तीसरे दिन बहू रानी का मूड अच्छा और खुश खुश सा दिखा! अतः मैंनें शाम को रोमांटिक बनानें के लिए बहू रानी को आउटिंग पर ले जानें और बाहर ही डिनर करनें का प्रस्ताव रखा जिसे बहूरानी नें तुरंत हंस कर मान लिया|

“ठीक है पापा जी! पहले मॉल में चलेंगे मुझे शॉपिंग करवा देना! आप फिर वहीं पर किसी अच्छे रेस्तरां में डिनर भी करवा देना| फिर घर लौट के मैं आपको बढ़िया सरप्राइज दूंगी बिस्तर में|” बहूरानी रहस्य भरी मुस्कान के साथ बोली|
“क्या! सरप्राइज दोगी बिस्तर में? मैं कुछ समझा नहीं बहू बेबी?” मैंनें अचंभित होकर पूछा|
“इंतज़ार करो पापा जी| अभी थोड़ा सस्पेंस रहनें दो|”
“ओके माय डिअर बेबी! एज यू लाइक|” मैंनें भी कहा और बहूरानी के मम्में सहला दिए|

शाम को साढ़े पांच बजे के करीब हम लोग निकले| बहू रानी बड़ी सजधज कर टिपटॉप होकर आयी थी; मुझे भी कुछ यूं लग रहा था जैसे मैं फिर से अट्ठाईस साल का जवान हो गया हूँ और साथ में मेरी गर्लफ्रेंड चल रही है जिसे रात में जी भर के चोदना है|
ये सब सोचते ही मन उमंग तरंग से भर उठा| पार्किंग से मैंनें गाड़ी निकाली और बहूरानी को अपनें बगल में आगे बैठा के गाड़ी बढ़ा दी| साथ में मन में बहू रानी की सरप्राइज वाली बात भी हलचल मचा रही थी|

मॉल पहुँचते पहुँचते टाइम छः से ऊपर ही हो गया! अंधेरा होनें लगा था और मॉल में अच्छी चहल पहल हो गई थी| नयी नयी रंगीन तितलियां टाइट जींस टॉप पहले हुए! टॉप में से अपनें मम्मों का नजारा दिखलातीं हुई! हाथ में बड़ा वाला स्मार्ट फोन लिए अपनें मम्में मटकाती इठलाती हुई घूम रहीं थीं|
मैं और अदिति भी किसी प्रेमी युगल की तरह एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए दुकानों के नज़ारे देखते जा रहे थे| बीच बीच में अदिति को जो चाहिए होता वो खरीदती जा रही थी|

परफ्यूम! शैम्पू! नाईट गाउन! डिज़ाइनर ब्रा और पैन्टीज के सेट इत्यादि और मेरे लिए एक शर्ट और टाई भी बहूरानी नें पसन्द की; सामान के चार पांच बैग्स मैं ही ले के चल रहा था| यूं ही घूमते घामते! खरीदारी करते करते सवा नौ बज गए; अब भूख भी जोर से लगनें लगी थी अतः बहूरानी की पसन्द के रेस्तरां में हमनें बढ़िया डिनर लिया|
घर लौटते लौटते ग्यारह के ऊपर ही टाइम हो गया|

घर पहुँचते ही शॉपिंग बैग्स वहीं सोफे पर फेंक के मैंनें बहूरानी को दबोच लिया|
“पापा जी! थोड़ा रुको तो सही| बस दो मिनट| पहले मैं सू सू कर लूं| फिर पूरी तरह से आपकी!”
“ओके डार्लिंग बेबी! ट्रीट योरसेल्फ वेल!”
“बस अभी आती हूँ|” बहू रानी बोली और वाशरूम में घुस गयी|

बहू रानी के वाशरूम में घुसते ही तेज सीटी की आवाज सुनसान घर में गूंजनें लगी| ये चूत से निकलती सीटी मुझे सुननें में बहुत मजेदार लगती है और अदिति बहूरानी की चूत तो सू सू करते टाइम ऐसे सीटी निकालती है जैसे कहीं लगातार घुंघरू से बज रहे हों|

कुछ ही समय बाद हम दोनों ससुर बहू बहूरानी के बेडरूम में मादरजात नंगे एक दूसरे की बांहों में लिपटे पड़े थे| मैं बहूरानी के मम्में गूंथते हुए उसके गाल काट रहा था और बहूरानी मुझसे बचनें के लिए अपना मुंह दायें बाएं हिला रही थी|

“बस करो पापा अब… नीचे वाली की भी कुछ खबर लो!” बहूरानी अपनी चूत पर हाथ फेरती हुई बोली|

मैं बहूरानी का बदन चूमते हुए नीचे की तरफ उतरा! होंठ चूसनें के बाद गला दोनों दूध पेट नाभि और जांघें; इन सबको चूमते चाटते मैं उसकी गुलाबी जांघों पर ठहर गया| जवान औरत की नंगीं जांगहें चाटनें का अपना एक अलग ही किस्म का मज़ा आता है| बहूरानी की चूत से दालचीनी जैसी गंध उठ रही थी| मैंनें मस्त होकर उसके दोनों बूब्स पकड़ लिए और जांघों को चाटते चाटते चूत के होंठ चाटनें लगा|
बहूरानी अपनी चूत अच्छे से धो कर आईं थीं सो हल्का सा गीलापन और पानी की नमी अभी भी थी चूत में|

मैं पूरी तन्मयता के साथ बहूरानी की जांगहें और चूत का त्रिभुज चूम चूम के चाटे जा रहा था और बहूरानी अपनी एड़ियाँ बेड पर रगड़ते हुए कामुक सिसकारियां निकाल रही थी|
“हाय पापा जी! खा जाओ मेरी चूत को! ये लो|” बहूरानी बोली और अपनी चूत की फांकें दोनों हाथों से धीमे से खोल दी|

मैंनें भी अपनी जीभ उसकी चूत के दानें पर रख दी और उसके निप्पल निचोड़ता हुआ चाटनें लगा| बीच बीच में मैं उसकी चूत के दानें को थोड़ा जोर से दांतों में दबा लेता जिससे बहूरानी उत्तेजना के मारे उछल जाती और मेरे बाल मुट्ठी में भर लेती|
ऐसे करनें से बहूरानी कुछ ही देर झेल पाई और उसकी चूत का बांध टूट गया! वो भलभला के झड़ गयी और बदन को ढीला छोड़ के गहरी गहरी सांसें लेनें लगी|

“अब आप लेट जाओ पापा!”
मेरे लेटते ही बहूरानी नें मेरा लंड पकड़ लिया और जल्दी जल्दी आठ दस बार इसे मुठियाया और फिर सुपारा मुंह में भर लिया और मेरी तरफ मुस्कुरा के देखती हुई चूसनें लगी| लंड चूसनें में तो मेरी बहूरानी को विशेष योग्यता प्राप्त है| लंड कैसे कहाँ से पकड़ना है कैसे चाटना है! लंड को हाथ से छोड़ के जीभ से कैसे छूना चाटना और मुंह में लेना है; ये सब कला वो बखूबी जानती है|

कुछ देर बहूरानी नें सुपारा चूसनें के बाद लंड छोड़ दिया और सुपारा भी मुंह से बाहर निकाल दिया और एक जोरदार चटखारा लिया जैसे कोई पसंदीदा चाट खा कर स्वाद लेते हुए चटखारे लेते हैं या कोई बच्चा अपनें मन पसन्द खिलौनें से खेल कर हर्षित होता है|

मेरा तमतमाया हुआ लंड छत की तरफ मुंह उठाये किसी खम्भे जैसा खड़ा था! बहूरानी की लार नीचे बह बह के मेरे अण्डों को भिगो रही थी| बहूरानी नें लंड को फिर से चूमा और फिर से इसे चूस चूस कर लाड़ प्यार करनें लगी साथ में दूसरे हाथ से अपनी चूत भी सहलाती मसलती जा रही थी|
“पापा जी! अब जल्दी से अपना झंडा गाड़ दो मेरी चूत में|” वो बोली और मेरे बगल में लेट गयी|

मैंनें भी देर न करते हुए अपनी पोजीशन ले ली! मुझे भी निपटनें की जल्दी थी! आधी रात कब की गुजर चुकी थी मेरे पास बस यही रात थी| कल शाम को साढ़े पांच की ट्रेन से मेरा बेटा बैंगलोर से वापिस लौट रहा था|
यही सोचते हुए मैंनें अपना लंड बहूरानी की चूत से सटाया और एकदम से पेल दिया लेकिन लंड फिसल गया! मैंनें फिर से उसकी चूत के छेद पर लंड को बिठाया और धकिया दिया आगे|
लेकिन नहीं! बहू रानी की चूत का दरवाजा तो जैसे सील बंद था|

मैंनें बहूरानी की ओर देखा तो वो हंस रही थी|
“अदिति तू हंस क्यों रही है?”
“घुसाओ पापा जी! पूरी ताकत लगा दो लंड की|” बहूरानी बोली और वो हंस दी|

मैं भी अचंभित था! जिस चूत को मैं पहले बीसों बार चोद चुका था! जिस चूत के मुहानें पर लंड रखते ही वो लंड को गप्प से लील जाती थी आज वही चूत किसी सील बन्द कुंवारी कन्या की चूत की तरह टाइट सील बंद सी लग रही थी|
मैंनें फिर से चूत को अपनें हाथों से खोला और चूत के भीतर का जायजा लिया| बहूरानी की चूत की सुरंग जैसे चिपक गयी थी! ‘एडमिशन क्लोज्ड’ जैसी स्थिति लग रही थी|

“ओये अदिति… ये तेरी चूत आज इतनी तंग कैसे हो गयी किसी बच्ची की चूत की जैसे?”
“पापा जी! मैंनें कहा था न आपसे कि आपको बेड में सरप्राइज दूंगी| यही सरप्राइज है| अब आप ताकत से लंड घुसाओ और जीत लो मुझे!” बहू रानी जैसे चैलेंज भरे स्वर में बोली|

“अच्छा| देखता हूँ| अभी लो|” मैंनें कहा और उसकी चूत को अच्छे से खोल कर चाटना शुरू किया और अपनी बीच वाली उंगली थूक से गीली करके चूत में घुसाई| बड़ी मुश्किल से दो पोर ही घुसीं थीं कि आगे रास्ता बंद मिला|
उधर बहूरानी मुझे देख देख के मन्द मन्द मुस्कुरा रही थी- क्या हुआ पापा! आपकी उंगली भी नहीं घुस रही है अपना मूसल कैसे घुसाओगे मेरी छुटकी में?
“तेरा सरप्राइज अच्छा लगा अदिति बिटिया! अभी देख कैसे घुसता है तेरी छुटकी में!” मैंनें कहा और उठ कर बहूरानी की ड्रेसिंग टेबल से हेयर आयल की शीशी में से तेल लेकर लंड को अच्छे से चुपड़ लिया और दो तीन बार फोरस्किन को आगे पीछे कर के लंड को चूत के द्वार पर रखा और धीरे धीरे ताकत से आगे धकेलनें लगा|

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ऐसे तीन चार बार करनें से मेरी कोशिश रंग लायी और मेरा सुपाड़ा बहू की चूत में घुसनें में कामयाब हो गया| मैं इसी पोजीशन में गहरी गहरी सांसें भरता हुआ लंड को आगे पीछे डुलाता रहा| कुछ ही देर में लगा की चूत कुछ नर्म पड़ गयी है| बस अब क्या था; बहूरानी के दोनों मम्में कस कर दबोच कर लंड को पूरी ताकत से फॉरवर्ड कर दिया उसकी चूत में|
इस बार पूरा लंड जड़ तक समा गया बहू की चूत में| मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा लंड किसी नें अपनी मुट्ठी में पकड़ कर ताकत से दबा रखा हो|

उधर बहू रानी के चेहरे पर तकलीफ के चिह्न दिखाई दिए|

“वेलडन! पापा… यू हेव डन इट| नाउ फ़क मी लाइक एनीथिंग|” बहू रानी मुझे चूमते हुए बोली|
“वो तो अब चोदूँगा ही तेरी चूत को| पहले ये बता कि आज तेरी चूत ऐसी टाइट कैसे हो गयी?” मैंनें अधीरता से पूछा|
“पापा जी क्या करोगे आप ये जान के| ये तो हम लेडीज का सीक्रेट हैं|”
“अरे बता तो सही! कैसे चिपका ली अपनी चूत तूनें?”

“पापा जी! आपको क्या लेना देना इससे… आपनें मुझे जीत लिया अब जैसे चाहो चोदो मुझे… ऍम हॉर्नी नाउ… फाड़ दो इसको!”
“नहीं! पहले बता तू! तभी चोदूँगा तेरे को!” मैंनें भी जिद की और अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया|
“लेकिन आप जान के क्या करोगे?”
“तेरी सासू माँ की चूत भी ऐसी ही टाइट करके सरप्राइज दूंगा उसे|” मैंनें कहा|

“ओह पापा जी! आप भी ना| अच्छा सुनो वो होती है न… उसे… … …” बहूरानी नें मुझे घिसी पिटी ढीली ढाली चूत को फिर से कुंवारी चूत की तरह टाइट कर लेनें का उपाय बताया|
“इस प्रयोग को क्या कोई भी कर सकती है?” मैंनें पूछा|
“नहीं पापा जी! स्त्री की उम्र उसकी चूत की बनावट और ढीलेपन के अनुसार ही इसका प्रयोग कुछ फेर बदल के साथ किया जाता है|”

“ह्म्म्म… बढ़िया| तो बेटा ये बता कि ये ज्ञान तुझे किसनें दिया?”
“पापा जी! वो मेरी बड़ी मामी हैं न वो बुरहानपुर में आयुर्वेदाचार्य हैं| उनसे मेरी सहेलियों की तरह बातें होती हैं; एक बार उन्ही नें ये सब प्रयोग मुझे बताये थे| मैंनें इस्तेमाल आज पहली बार ही किया है| ऐसे प्रयोग कई तरह के हैं मैं वो सब आपको बता दूंगी|”
“बढ़िया लगा| अब घर जा के तेरी सासू माँ की चूत की खबर लेता हूँ|” मैंनें कहा और बहूरानी की तंग चूत में अपना मूसल पेलनें लगा|

थोड़ी देर की मेहनत के बाद चूत की पकड़ कुछ लूज हुई तो लंड आराम से मूव करनें लगा| बस फिर क्या था! मैंनें बहूरानी के दोनों पैर अपनें कन्धों पर रखे और उसकी दोनों चूचियां दबोच के चुदाई शुरू कर दी! पहले आराम से धीरे धीरे! फिर तेज और तेज फिर पूरी बेरहमी से| ऐसा लग रहा था जैसे किसी नयी नवेली चूत की पहली पहली चुदाई हो रही हो|

बहू रानी भी मस्ता गयी अच्छे से और कमर उठा उठा के हिचकोले खाती हुई लंड का मज़ा लेनें लगीं|
मैं थोड़ी देर रिलैक्स करनें के लिए रुक गया| मेरे रुक जानें से बहूरानी नें मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा जैसे आंखों ही आंखों में पूछ रही हो कि रुक क्यों गए|
“बस बेटा एक मिनट” मैंनें कहा और लंड को उसकी चूत से बाहर खींच लिया| चूत से ‘पक्क’ जैसी आवाज निकली जैसे कोल्ड ड्रिंक का ढक्कन ओपनर से खोलते टाइम निकलती है|

बहूरानी की चूत रस से सराबोर होकर बहनें लगी थी! मैंनें नेंपकिन से उसकी चूत और अपनें लंड को अच्छे से पोंछा और चूत में उंगली घुसा कर भीतर की चिकनाई निकाल कर अपनें टोपे पर चुपड़ी और बहू को घोड़ी बना कर लंड को फिर से चूत के ठीये पर रख कर धकेल दिया|
इस बार भी लंड को ठेलना पड़ा तब जा के रगड़ता हुआ घुस पाया|
“आह…धीरे पापा जी| चूत की चमड़ी खिंच रही है|” बहू रानी बोली|
“अदिति बेटा तुम्ही नें तो अपनी चूत कस ली है! अब लंड को थोड़ा सहन करो|” मैंनें कहा और धीरे धीरे चोदनें लगा बहू को|

एकाध मिनट की चुदाई के बाद बहूरानी की चूत रसीली हो उठी और लंड चूत में सटासट चलनें लगा|
“आह… वंडरफुल चुदाई… लव यु माय ग्रेट पापा|” वो बोली और अपनी चूत ऊपर उठा दी|
मैं भी थोड़ा सा ऊपर को खिसका और जम के धकापेल उसकी चूत बजानें लगा| बहूरानी की चूत बिल्कुल वैसा मज़ा दे रही थी जैसे किसी कुंवारी गर्लफ्रेंड की चूत देती है|

बेडरूम में बहूरानी की कामुक कराहें और उसकी चूत से निकलतीं फचफच फचाफाच की आवाजें गूंज रहीं थीं उसकी चूत मेरे लंड से लोहा लेती हुई संघर्षरत थी|
जल्दी ही हम दोनों मंजिल के करीब जा पहुंचे और बहूरानी कामुक किलकारियां निकालती हुई कमर उछालनें लगी और फिर उसनें मुझे अपनें बाहुपाश में जकड़ लिया और टाँगे मेरी कमर में लपेट कर झड़नें लगी|
मैंनें भी आठ दस धक्के पूरी ताकत से लगाये; बहूरानी अपनी बांहों और टांगो से मुझे जकड़े थी जिससे मेरे धक्कों से उसका बदन उठता और गिरता था लेकिन वो मुझसे चिपटी रही और कुछ ही पलों में लंड जैसे फटनें को हुआ और रस की फुहारों से चूत को भरनें लगा और शीघ्र ही वीरगति को प्राप्त होकर निढाल बाहर निकल गया|

तो मित्रो! अब ये मेरी सच्ची दास्तान समाप्ति पर है| फिर उस रात हम दोनों नंगे ही लिपट कर बेसुध होकर सो गए|
हमेशा की तरह पांच बजे मेरी नींद खुल गयी! बहूरानी का एक हाथ अभी भी मेरी गर्दन में लिपटा था और वो नींद में किसी अबोध शिशु की तरह गहरी गहरी सांसें लेती हुई निद्रामग्न थी| उसके नग्न उरोज सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे|

जैसा कि सुबह सुबह होता ही है! मेरे लंड महाराज टनाटन तैयार खड़े थे मन तो हुआ कि नंगी बहूरानी के पैर खोल कर लंड चूत में पहना कर फिर से आँख मूंद कर पड़ा रहूँ| लेकिन बहूरानी को जगानें का दिल नहीं किया सो चुपके से बहूरानी के आगोश से निकलनें लगा|

जैसे ही उसका हाथ अपनी गर्दन से हटाया वो जाग गयी- ऊंऊं… कहाँ जा रहे हो पापा?
उसनें मुझे फिर से लिपटा लिया|
“अरे सुबह हो गयी! मैं तो जल्दी उठ जाता हूँ न| तू सोती रह आराम से!”
“नहीं! आप भी यहीं रहो मेरे पास|” बहूरानी नें मुझे फिर से लिपटा लिया|

थोड़ी ही देर में बहूरानी को मस्ती चढ़नें लगी और उसनें मेरा लंड पकड़ के खेलना शुरू कर दिया फिर मेरी कमर में अपना पैर फंसा कर मुझे अपनी तरफ खींच लिया और मुझे चूमनें लगी| मैंनें भी उसकी टांगें खोल के लंड को बहु की चूत पर रखा और धीरे से घकेल दिया भीतर|
“बस अब चुपचाप लेटे रहो पापा! धक्के नहीं लगाना|” वो बोली|

मुझे पता था इस पोजीशन का भी अपना अलग ही आनन्द है| चूत में लंड फंसाए पड़े रहो बस| ऐसी पोजीशन में भी बदन में अजीब सी सनसनाहट! सुरसुरी होती रहती है और फिर एक स्थिति ऐसी आ जाती है कि दोनों पार्टनर मिसमिसा कर लिपट जाते हैं और चूत लंड की लड़ाई होनें लगती है|

हुआ भी वही| हम लोग ऐसे ही एक दूसरे के अंगों का आनन्द महसूस करते चिपटे हुए लेटे रहे| लगभग आधे घंटे बाद लंड अनचाहे ही चूत में अन्दर बाहर होनें लगा! उधर चूत भी प्रत्युत्तर देनें लगी! हमारे होंठ एक दूसरे से लड़नें लगे| बहू रानी की जीभ पता नहीं कब मेरे मुंह में घुस गयी और वो करवट लिए लिए ही अपनी चूत चलानें लगी| जल्दी ही लंड नें लावा उगल दिया और चूत फैल सिकुड़ कर लंड को निचोड़नें लगी|

सुबह की धूप बेडरूम में खिड़की से झांकनें लगी थी| हमारे नंगे जिस्म अभी भी चुदाई की खुमारी में थे|
“उठनें दो पापा| काम वाली आ जायेगी सात बजे!”
“अरे अभी छह ही तो बजे हैं! चली जाना|”
“नहीं पापा| उठो आप भी और ड्राइंग रूम में सो जाओ| मैं बिस्तर ठीक कर दूं| काम वाली आपको यहाँ सोते देख पता नहीं क्या सोचे… अच्छा नहीं लगेगा|” बहूरानी नें अपनी चिंता जताई|

बहूरानी की समझदारी पर मैं भी खुश होता हुआ बिस्तर से निकल गया|
अब सोना किसे था| मैं तैयार होकर सुबह की सैर पर निकल पड़ा| उसी दिन मेरा बेटा बैंगलोर से वापस लौट रहा था| मुझे भी आज ही रात घर लौटना था| मेरी ट्रेन भी रात में साढ़े दस पर थी| बहूरानी के साथ चुदाई के ये दस दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला|

शाम को सवा पांच बजे मैं और बहू रानी स्टेशन पहुंच गए| बेटे की ट्रेन राईट टाइम थी| फिर मेरे चार पांच घंटे बेटे के साथ अच्छे से गुजरे|
डिनर के बाद बेटा और बहू दस बजे मुझे स्टेशन छोड़नें आये|

तो मित्रो! मैंनें इस रियल सेक्स स्टोरी को भरसक ईमानदारी से लिखा है| हाँ कहीं कहीं मिर्च मसाला भी लगाया है ताकि कथा की रोचकता बनी रहे और आप सबके लंड और सबकी चूतें मज़ा लेती रहें पढ़ते पढ़ते|
अब आप सबको अपनें अपनें कमेंट्स मेरी नीचे लिखी मेल आई डी पर जरूर लिख भेजनें हैं और अपनें अमूल्य सुझाव देनें हैं ताकि मैं अपनी अगली कहानियों में उचित सुधार कर सकूं|

मेरी अगली नयी कहानी के लिए मैं ऐसी लड़कियों से मित्रता करना करना चाहता हूँ जो मेरे साथ सेक्स चेट्स करते हुए मेरी कुछ जिज्ञासाओं का समाधान कर सकें|
यदि आप पाठिकाओं में से कोई मेरा साथ निभानें को तैयार हो तो मुझे अवश्य मेरी जी मेल आई डी पर संपर्क करें|
धन्यवाद
anjlimehta@gmail.com

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