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“अपने साली की बेटी को चोदने की इच्छा”-2

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पता नहीं क्यों! पर मैं कह बैठा:- कोई देखा क्या?

उसनें बड़ी हैरानी से पहले मेरी तरफ देखा और बोली:- नहीं! पर सोच रही हूँ! ऐसा कौन हो सकता है! जो मेरा या काम भी कर दे और मेरे राज़ को राज़ भी रखे और जिस पर मैं भरोसा भी कर सकूँ|

मेरा मन तो उछल पड़ा|

मैंनें कहा:- देखो बेटा! मुझे नहीं पता के तुम्हारे मन में कौन चल रहा है! पर तुम्हारी ये सारी शर्तें मैं भी पूरी कर रहा हूँ!
कहनें को तो मैंनें कह दिया पर गान्ड मेरी फटी पड़ी थी|

लवली नें मेरी तरफ देखा और बोली:- आपके बारे में भी मैंनें सोचा था! और मुझे भी यही सही लगा था| पर मन में एक डर था! के आप तो मुझे अपनें बच्चों की तरह प्यार करते हो पता नहीं मेरी बात का बुरा न मान जाओ?

‘अरे नहीं बेटा! अगर मैं अपनें बच्चों के किसी भी काम आ सका तो मुझे बहुत खुशी होगी|’ मैंनें कहा|
वो उठ कर जानें लगी तो मैंनें पूछा:- तो फिर कब?

वो पलटी! मेरी तरफ आई! अपना चेहरा मेरे चेहरे के पास लाकर बोली:- आज ही रात!

जब उसका चेहरा मेरे इतना पास था तो मेरे मन में लालच आ गया! मैंनें पूछा:- क्या मैं तुम्हें चूम सकता हूँ?

वो अपना चेहरा मेरे चेहरे के और पास ले आई! मैंनें उसका चेहरा अपनें दोनों हाथों में पकड़ा और उसके नीचे वाले होंठ को अपनें होंठों में पकड़ कर चूस लिया! सिर्फ एक छोटा सा चुम्बन|

वो चली गई और मैं तो बिस्तर पे उल्टी छलांगें मारनें लगा| उसके चेहरे के स्पर्श! उसके होंठों का चुम्बन मेरे तो तन बदन में आग लग गई|

सबसे पहले मैं बाथरूम में गया और अपनी खुशी को संभालनें के लिए मैंनें मुट्ठ मारी| जब वीर्य की पिचकारियाँ निकाल दी! तब मन कुछ शांत हुआ|
शाम को मैं एक केमिस्ट के गया और उस से सुपर एक्ट 99 गोल्ड के दो कैप्सूल लाया! एक तो तभी खा लिया|

अब यह था! एक 24 घंटे में लंड कभी भी लोहा बना लो|

सो शाम को साढू भाई के साथ दो दो पेग भी चले! खाना भी खाया! पर अब एक बात थी! जब भी लवली हमारे आस पास से गुजरती! मुझे ऐसे लगता जैसे मेरे कोई गर्ल फ्रेंड हो! जैसे जवानी में कोई लड़की पटाई हो! वैसे फीलिंग आ रही थी|
खैर रात को सब सो गए! मगर मुझे नींद कहाँ|

फिर भी मैं सो गया|

रात के करीब 2 बजे के बाद मुझे लगा! जैसे किसी नें मेरे पाँव को छूआ हो| मैंनें देखा! नाइट लैम्प की रोशनी में! लवली खड़ी थी|

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मैंनें उसे इशारा किया! वो चल पड़ी तो मैं भी चुपचाप उसके पीछे चल पड़ा|

वो मुझे ड्राइंग रूम में ले गई! वहाँ कोई नहीं था|
मैंनें उसे नीचे कार्पेट पे ही लेटा लिया! उसे अपनी बाहों में भर के मैंनें उसके चेहरे पे यहाँ वहाँ चूमना शुरू किया तो वो धीरे से बोली:- मौसा जी! इन सब कामों के लिए टाइम नहीं! आप बस जल्दी से जो ज़रूरी काम है! वो करो|

अब उसके तो बदन के स्पर्श से ही मेरा लंड पत्थर का हुआ पड़ा था! उसनें अपनी स्कर्ट ऊपर उठाई और चड्डी उतार दी:- बस डाल दो! वो बोली|
मैंनें भी झट पट से अपना लोअर नीचे करके उतारा और अपना लंड उसकी चूत पे रखा और अंदर धकेला| बेशक उसकी चूत बिल्कुल सूखी पड़ी थी! मगर चुदी तो वो थी ही! तो मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया|

‘आह’ उसके मुँह से एक हल्की सी सिसकारी निकली! मैंनें भी फिर बिना कोई और औपचारिकता किया अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया और चोदनें लगा|
‘जानती हो लवली मेरी बहुत समय से इच्छा थी तुम्हें चोदनें की!’ मैंनें उसके कान में कहा|

‘पता है मुझे…’ वो बोली:- मुझे याद है! एक बार जब हम आपके घर आए थे तो आपनें रात को सोते हुये मेरे बूब्स को दबाया था| इसी वजह से आप भी मेरी लिस्ट में थे कि अगर और कोई नहीं माना तो अपनें बच्चे के लिए मैं आपसे विनती करती|

‘अरे विनती नहीं! मेरी जान हुकुम करती तुम हुकुम…’ मैंनें कहा:- ‘बात सुन! थोड़ा दूध तो पिला साली!
मैंनें कहा तो लवली नें अपनी टी शर्ट और अंडर शर्ट दोनों ऊपर उठा कर अपनें चिकनें और मुलायम बोबे बाहर निकाल कर मेरे हवाले कर दिये|

मैंनें उसके बोबे चूमे! चाटे! चूसे और दाँतों से काटे भी! जो भी कर सकता था किया! नीचे से अपना लंड भी पेल रहा था|

अब लवली को भी मज़ा आनें लगा था! उसकी चूत भी पानी से लबालब हो गई थी! उसनें अपनी टाँगें मेरी कमर के इर्द गिर्द लिपटा ली| ‘मौसा जी! ज़ोर ज़ोर से करो! बहुत मज़ा आ रहा है|’
मैंनें कहा:- नहीं ज़ोर से करूंगा तो आवाज़ सुन जाएगी! बस यूं ही धीरे धीरे करेंगे|

‘ठीक है! मौसाजी! क्या आप मेरी जीभ चूसोगे! मेरा होनें वाला है! और मुझे जीभ चुसवाते हुये झड़ना अच्छा लगता है|’ लवली नें कहा| मैंनें लवली की तीखी और लंबी जीभ अपनें मुँह में ली और उसे अंदर खींच खींच कर चूसनें लगा|

लवली नें मुझे अपनी बाहों में कस लिया और नीचे से कमर भी उचकानें लगी! उसके मुँह से ‘ऊँह! ऊँह’ की आवाज़ें आ रही थी! जिसे मैं अपनें मुँह से दबानें की कोशिश कर रहा था|
और फिर लवली नें अपनी कमर की स्पीड बढ़ा दी और एकदम से अपनी जीभ मेरे मुँह से निकाल कर अपनें दाँतों से मेरे नीचे वाले होंठ को काट खाया|

मैं समझ गया कि यह तो झड़ गई|

जब वो शांत हुई! तो मैंनें उसे कहा:- घोड़ी बनेंगी! ताकि मैं भी अपना माल छुड़वा सकूँ|वो बोली:- नहीं! मैं ऐसे ही आपका माल अपनें अंदर लूँगी|

मैंनें फिर अपनी स्पीड बढ़ा दी क्योंकि अब मुझे सिर्फ झड़ना ही था और अगले ही पल मैंनें अपनें लंड की पिचकारी से अपनें गरम वीर्य की धारें उसकी चूत में छोड़ दी|

इस चुदाई में मुझे इतना आनन्द आया कि मेरे लंड नें इतना वीर्य स्खलित किया कि मुझे खुद हैरानी हुई कि इतना वीर्य?

खैर जब मैं भी झड़ गया तो मैं उसके ऊपर से उठा|

‘आह! बहुत मज़ा आया! मेरी बच्ची! बस एक और इच्छा है!

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