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“अपनी सौतेली माँ की बेटी की चुदाई”

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मेरा नाम जय है| मैं 20 साल का हूँ| मैं आप सभी को अपनी कहानी बतानें जा रहा हूँ|
बात सन 2016 की है| मैं 19 साल का था| मेरे पापा नें मेरी माँ के होते हुए दूसरी शादी की और जो दूसरी वाली बीवी थी| उसे हम किसी भी तरह से उसे अपनें मन में नहीं बैठा पाए थे| लेकिन कोई बात नहीं| मेरी मम्मी इस शादी से गुस्सा होकर अलग रहनें लगी थीं|
मैं अपनें पापा के साथ ही रहता था| इन नई वाली मम्मी के साथ जब पापा नें शादी की तो उसके साथ माया की एक लड़की भी हमारे घर पर आ गई थी| जो कि 18 साल की थी|

वो मुझे बड़े गौर से देखती थी| लेकिन उसके बारे में मेरी ऐसी कोई गन्दी सोच नहीं थी|

मैं उससे पूछा- तुम मुझे ऐसे क्यों देखती हो|?
तो बोली- मुझे तुम अच्छे लगते हो और मैं तुमसे प्यार करनें लगी हूँ|

मैं उससे मना किया- यह ग़लत है| तू अब रिश्ते में मेरी बहन हो|

पर नहीं| उस पर तो प्यार का भूत सवार था| वो बोली- जैसे मेरे लिए पापा नकली हैं| वैसे ही भाई भी नकली है|
मुझे यह सुन कर बहुत बुरा लगा| पर कोई बात नहीं मैं चुप रह गया|
मैं और वो एक ही कमरे में सोते थे|

एक दिन की बात थी| रात को मैं सो रहा था तो माया की मेरे को गाल पर किस किया| मैं कहा- यह क्या कर रही है| पागल है क्या?

वो बोली- तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो|
वो मेरे को बार- बार किस करनें लगी| मैं उससे दूर हो गया| तभी माया की अपना हाथ मेरे लंड पर लगा दिया और बार- बार मेरा लौड़ा सहलानें लगी|

मेरा लंड जो कि 7|5 इंच का लंबा और 2 इंच मोटा था| मैं माया की इस हरकत का कोई उज्र नहीं किया|
माया की मेरा विरोध न होते देख कर अपना हाथ मेरे लंड पर पूरे दम से लगाया और हिलानें लगी| लौड़ा खड़ा हो गया| माया की मेरे खड़े लंड को देख| तो आँखें फैला कर बोली- हाय| इतना बड़ा|?

मुझे भी मस्ती चढ़नें लगी थी|

माया की मेरे लौड़े को बाहर निकाला| उसे अपनें मुँह में ले लिया और चूसनें लगी|
अब मुझे डर लग रहा था कि कोई देख ना ले| लेकिन मेरा भी मन कर रहा था|

कुछ पलों बाद मैं उससे दूर हो गया और सो गया, वो भी गुस्से में आ गई| और सो गई|
एक दिन जब घर पर कोई नहीं था| मैं अकेला था| पापा और नई वाली मम्मी अपनें घर गई थी| वो मुझसे ये बोल कर गई थीं- मैं कल आऊँगी| अपनी बहन का ध्यान रखना|

वो चली गईं|
बहन स्कूल से आई| माया की मुझसे पूछा- मेरी मम्मी कहाँ हैं?

मैं कहा- वो अपनें घर गई हैं| कल आएंगी|
तो वो बहुत खुश हुई और हँसते हुए अपनें कमरे में गई| फिर वो कपड़े बदल कर वापस आई|

मैं कहा- खाना रखा है| खा ले|
मैं बिस्तर पर बैठा टीवी देख रहा था| तो वो मेरे पास आई और आकर मेरे आगे लेट गई|
मैं उसे देखा| माया की केवल समीज़ पहन रखी थी और नीचे शॉर्ट निक्कर पहना हुआ था|

वो धीरे- धीरे पीछे को आनें लगी| और ज्यों ही मुझसे पूरी तरह सट गई और अपना हाथ मेरे लंड पर रगड़नें लगी|

मैं बनियान ओर कैपरी पहनी हुई थी|
उसके हाथ फेरनें से मेरा लंड धीरे- धीरे खड़ा हो गया| माया की मेरी तरफ देखा और बैठ कर मुझे किस करनें लगी| फिर वो मेरे होंठों पर चुम्बन करनें लगी|
तो फिर मैं भी चालू हो गया, मैं भी उसे किस करनें लगा|

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अब वो भी जोश में आ गई थी|

मैं धीरे- धीरे नीचे की तरफ बढ़ा| उसके छोटे- छोटे चीकू जैसे चूचे सहलाए| वो मस्त होनें लगी| फिर मैं उनको मुँह में लेकर चूसनें लगा|

मेरा एक हाथ उसके निप्पलों पर था जिसे मैं धीरे- धीरे मसल रहा था| वो बहुत ज़ोर से गरम होनें लगी| माया की मुझे कस कर पकड़ लिया|
मैं उसके सारे कपड़े उतार दिए| कपड़े उतरनें के बाद मैं उसका जिस्म देखा छोटी- छोटी चूचियाँ थीं और पतली सी कमर| माया की चुत पर तो बाल थे ही नहीं| जरा- जरा से रोएं से थे|

माया की मेरे निक्कर में हाथ दिया और मोटे लंड को बाहर निकाल लिया|

अब माया की मेरे लौड़े को हिलाया और मुँह में ले लिया| मैं माया की प्यारी सी चुत में ऊँगली डाल रहा था|
वो बार- बार मेरा हाथ वहां से निकाल दे रही थी| क्योंकि माया की इससे पहले किसी के साथ चुदाई नहीं की थी|
अब मैं माया की चुत को चाटनें लगा| उसका जोश और बढ़ गया|

वो फिर खुद अपनी चुत में ऊँगली डालनें लगी|
मैं फिर से उसे अपनी ऊँगली से कुरेदा और जब माया की चुत नें रस छोड़ दिया तो मैं पोजीशन में आकर माया की कोमल सी चुत पर अपना बेशरम लंड रख दिया|
अभी मैं थोड़ा सा लौड़ा ही अन्दर किया था| कि माया की दर्द के मारे उसे बाहर निकाल दिया|

मैं उसे सवालिया निगाहों से देखा|

बोली- लग रही है|

मैं लौड़े को फिर से माया की चुत पर लगाया| माया की फिर हटा दिया| फिर मैं माया की चुत पर थूक लगाया और अपनें लंड पर भी थूक लपेटा|

अब मैं लंड को माया की चुत पर रखा और घिसनें लगा| तो वो सिस्यानें लगी|
मैं इसी रगड़ाई के साथ हलका सा धक्का मार दिया| तो मेरे लंड का टोपा अन्दर चला गया और वो जोर से चिल्ला पड़ी- ऊ माँ| लग रही है| प्लीज़्ज़्ज निकाल लो…

मैं लौड़ा नहीं निकाला और उसे किस करनें लगा|

कुछ देर बाद वो शांत हो गई|
फिर मैं धीरे- धीरे उसे यूँ ही हिलाता रहा जब उसे मजा आनें लगा तो मैं फिर ज़ोर से एक झटका दिया| तो इस बार मेरा आधा लंड माया की चुत में घुस गया|

अब वो बहुत ज़ोर से चिल्लाई| 

मैं माया की छोटी- छोटी चूचियों को मुँह में लेकर चूसनें लगा, वो धीरे- धीरे शांत होनें लगी|
फिर मैं आधे लौड़े को ही धीरे- धीरे अन्दर- बाहर करनें लगा|
जब वो कुछ नॉर्मल हो गई तो जब मैं एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया और इस बार मेरा लंड माया की प्यारी सी चुत को चीरते हुए पूरा जड़ तक घुस गया|
माया की चुत में से खून निकलनें लगा|
माया की आँखों में से आंसू बहनें लगे और वो मेरे लंड को बार- बार हटानें की कोशिश करनें लगी| लेकिन मैं हटाया नहीं|
मैं उसके होंठों पर काफ़ी देर तक किस किया| फिर वो थोड़ी देर बार फिर से नॉर्मल हो गई|
अब मैं अपनें 7 इंच के लंड को धीरे- धीरे अन्दर- बाहर करनें लगा| अब उसे भी मजा आनें लगा| मेरा भी जोश और बढ़ गया|

मैं तेज- तेज चुदाई करनें लगा और कुछ देर बाद वो झड़ गई| और वो फिर मना करनें लगी| लेकिन मेरे को मजा आ रहा था| तो मैं नहीं हटा चुत में लण्ड पेलनें में लगा रहा| मैं बहुत देर तक माया की चुत मारी|
फिर मेरा पानी माया की चुत में झड़ गया| मैं माया की चुत से अपना लंड निकाला… तो देखा सारा लण्ड उसके खून से सना हुआ था|

माया की चुत ओर गाण्ड तक खून से सनी थी|

उसके बाद मैं उसे पूरे दिन| पूरी रात खूब चोदा| ओर अब वो मुझसे बहुत खुश है|
अब जब भी उसका मन होता है या मेरा मन करता है| तो मैं उसे जी भर कर चोदता हूँ| अब तो वो बहुत मस्त हो गई है माया की चूचियां अब चूचे बन गए हैं| मैं आज तक चोदता आ रहा हूँ|

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