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“अपनी सगी कुंवारी बहन की चुदाई की होली के दिन”-2

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दोस्तो! यह कहानी अन्य भाई बहन की चुदाई कहानी को आगे बढ़ानें का प्रयास है. इसलिए मेरी आपसे गुज़ारिश है कि पहले आप शुरू की कहानी

पढ़ लें उसके बाद ही इस कहानी को पढ़ें. कहानी का लिंक ऊपर दिया गया है.

अब तक आपनें पढ़ा कि कैसे अंकेश नें होली की मस्ती और नशे में अपनी बहन चिंता को अपनी पत्नी रीता के सामनें ही चोद दिया था. उसके बाद तीनों एक साथ नंगे नहाए और वहाँ बाथरूम में भी अंकेश नें चिंता बहन को एक बार और चोदा जिसमे रीता नें भी पूरा साथ दिया|
अब आगे…

बाथरूम नें नहाते नहाते जब मैं चिंता को चोद रहा था! तब तक नहानें की वजह से हम सब का नशा उतर चुका था लेकिन फिर भी मेरी बीवी और चिंता को कोई आपत्ति नहीं थी और हम तीनों पूरे होश में चुदाई का लुत्फ़ उठा रहे थे|
पहले मुझे लगा कि सोना (रीता) नशे में है इसलिए कुछ नहीं कह रही है लेकिन फिर जब चिंता को चोदनें के बाद मैं उसे चोद रहा था तो वो चिंता के साथ मस्ती कर रही थी! उसको दोबारा चुदाई के लिए तैयार कर रही थी|

आखिर में जब वो झड़नें की कगार पर पहुंची तो चिंता को मुझे किस करनें को कहा और मुझे उसकी चूचियां मसलनें को| मैं अपनी बहन के मुख में जीभ डाल कर उसे किस कर रहा था और साथ में बाएँ हाथ से उसे अपनी बाहों में भर के उसकी बाईं चूची मसल रहा था जबकि दाईं चूची मेरी छाती से चिपकी हुई थी| दूसरे हाथ से मैं सोना की कमर पकड़ के उसे चोद रहा था|
हम भाई बहन की ये वासना भरी स्थिति देखते हुए सोना जोर से झड़नें लगी|

बाथरूम से बाहर आकर भी किसी नें कपड़े नहीं पहनें! सबनें नंगे ही खाना खाया और फिर तीनों बेडरूम में ऐसे ही एक साथ लेट गए| मेरे एक तरफ चिंता और दूसरी तरफ सोना! दोनों मेरी तरफ करवट ले कर और मुझसे चिपक कर लेटी थीं|

मैंनें कहा:- आज जो भी हुआ वो कभी सोचा नहीं था. ना कि कभी ऐसा भी हो सकता है|
दोनों नें एक साथ कहा:- हम्म्म…
“मज़ा तो बहुत आया लेकिन सोना! तुम्हें बुरा तो नहीं लगा? और चिंता तुम्हें?” मैंनें दोनों से एक साथ सवाल कर दिया|

पहले चिंता बोली:- शुरू में अजीब लगा था लेकिन नशे में कुछ ज्यादा समझ नहीं आया और फिर बाद में मजा आनें लगा|
सोना नें भी इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा:- शुरू में नशे और मस्ती में ये समझ ही नहीं आया कि तुम मेरे सामनें अपनी बहन चोद रहे हो. लेकिन जैसे जैसे होश आता गया! मुझे बुरा लगनें की बजाए और अच्छा लगनें लगा| तुम अपनी सगी बहन चोद रहे हो! यह सोच सोच कर तो मैं इतनी गीली हो गई थी कि आज तक कभी नहीं हुई|

“हाँ! वो तो मैं समझ सकता हूँ! मैंनें भी तुमको कभी इतनी जोर से झाड़ते नहीं देखा| लेकिन ये सब शुरू शराब के नशे से हुआ और बाद में चुदाई के मज़े में मैंनें भी ध्यान नहीं दिया कि मैं बहनचोद बन गया हूँ| इसलिए अब जब सोचता हूँ तो लगता है कि कहीं हमनें कुछ गलत तो नहीं कर लिया?”

चिंता:- नहीं भैया! आप ऐसा ना सोचो! मैं तो बचपन से ही आपको बहुत चाहती थी और जब जवानी आई तो आप ही वो पहले मर्द थे जिसको मैं अपनी कल्पना में चोदा करती थी| मेरे ख्याल से कोई भी लड़की कभी ना कभी अपनें भाई की ओर आकर्षित ज़रूर होती है.
रीता:- हम्म्म! वो तो है.

चिंता:- क्योंकि सबसे पहले आप ही थे जिसको मैं इतना पास से देख पाती थी| और याद है वो एक बार जब आप बाथरूम से नहा के आ रहे थे और मैं जा रही थी तब आपका टॉवेल खुल गया था| वो पहली बार था जब मैंनें कोई जवान लंड देखा था| उस दिन पहली बार मैंनें बाथरूम में अपनी चूत में उंगली डाल के अपनी मुनिया को शांत किया था| वो तो ये समाज के नियम कानूनों की वजह से आगे कुछ करनें की हिम्मत नहीं हुई और इसी वजह से आज जब आज आपनें अपना लंड मेरी चूत में डाला तो मैंनें शुरू में थोड़ा मना भी किया लेकिन इसका मतलब ये नहीं था कि मैं ऐसा नहीं चाहती थी|

अंकेश:- चलो अच्छा हुआ तुमनें ये सब बता दिया अब मैं बिना किसी अपराधबोध (गिल्टी फीलिंग) के तुम्हारे साथ मज़े कर पाऊंगा| और सोना! तुम बहुत हाँ में हाँ मिला रहीं थीं| तुम्हारी भी कोई ऐसी तमन्ना थी क्या अपनें भाई के साथ?
रीता:- हाँ! लेकिन यहाँ तो आग दोनों तरफ बराबर लगी थी|

चिंता:- क्या बात है भाभी! फिर क्या आप पहले ही चुदवा चुकी हो अपनें भाई से?
रीता:- अरे न…हीं!
चिंता:- अब समझ आया आपको हमारी चुदाई देख कर बुरा क्यों नहीं लगा| क्या बात है भैया! भाभी तो पहले से ही भाईचोद हैं.
ऐसा कहते कहते चिंता बहुत उत्तेजित हो गई और मुझसे और जोर से चिपकते हुए उसनें मेरा लंड अपनें हाथ में लेकर 2:-3 झटके मुठ भी मार दी|

रीता:- अरे यार बात तो सुन लो| ऐसा कुछ नहीं हुआ था हमारे बीच|
चिंता:- दोनों तरफ आग बराबर लगी हो फिर भी हवनकुंड में घी ना गिरे! ऐसा कैसे हो सकता है?
रीता:- बताती हूँ बाबा पूरी कहानी बताती हूँ:

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एक बार मैं रात को पानी पीनें किचन में गई तो देखा सचिन के कमरे से हल्की लाइट आ रही थी| धीरे से खिड़की का दरवाज़ा हटा कर देखा तो सचिन कंप्यूटर के सामनें नंगा बैठा ब्लू फिल्म देख रहा था और साथ में मुठ मार रहा था| उसका लंड देखा तो मैं देखती ही रह गई| फिर वो थोड़ी देर बाद झड़ गया और सो गया| उस रात मुझे नींद ही नहीं आई! सारी रात आँखों के सामनें उसका लंड घूमता रहा और मैं अपनी चूत में उंगली करती रही|

उसके बाद मैंनें कई रातें इस चक्कर में बिना सोए बिता दीं कि शायद फिर कुछ वैसा ही देखनें को मिल जाए लेकिन कभी टाइमिंग सही नहीं बैठी|
एक दिन मेरे दिमाग में आईडिया आया कि एक तरीका है जिस से मैं रोज़ वो मस्त लंड देख सकती थी| फिर एक दिन जब घर पर मैं अकेली थी तो बड़ी मेहनत से मैंनें बाथरूम के दरवाज़े में ऐसा छेद किया जो आसानी से किसी को समझ ना आये|

उसके बाद जब भी सचिन नहानें जाता! मैं मौका देख के उस छेद से उसको नंगा देख लिया करती थी| लेकिन हमेशा वो लटका हुआ लंड ही देखनें को मिलता था| कुछ महीनें ऐसे ही बीत गए फिर एक दिन जब मैंनें छेद से देखा तो सचिन नें अपना लंड हाथ में ले कर सहलाना शुरू कर दिया| देखते ही देखते वो तन के खड़ा हो गया| लेकिन सचिन मुठ मारनें के जगह उससे खेल रहा था बस| उस दिन के बाद से वो रोज़ नहाते वक़्त अपनें लंड से खेलता और कभी कभी मुठ भी मारता|

मेरे दिन मज़े में कट रहे थे| जब घर में कोई और ना होता तो मैं नंगी हो कर जाती और उसको देखते देखते अपनी चूत और चूचों के साथ खेल कर झड़ भी जाती थी| लेकिन एक दिन मेरे मन में ख्याल आया कि पहले तो सचिन कभी अपनें लंड से नहीं खेलता था फिर अचानक अब रोज़ ऐसा क्यों करनें लगा? मुझे शक हुआ कि कहीं इसे पता तो नहीं कि मैं उसे देखती हूँ| पर अगर ऐसा ही था तो मतलब वो इस छेद के बारे में जानता था और वो भी इसका इस्तेमाल करता होगा|

उसके बाद जब मैं नहानें गई तो मैंनें ध्यान देना शुरू किया| मेरी नज़र उस छेद पर ही टिकी थी| थोड़ी देर बाद सच में उस छेद से जो थोडा लाइट आ रहा था वो बंद हो गया| मतलब कोई मुझे देख रहा था|
लेकिन कौन था ये नहीं कहा जा सकता था| अगले दिन मैं बाथरूम में आ कर नंगी हुई और शावर चालू करके तुरंत मैंनें अन्दर से बाहर की तरफ देखना शुरू किया| थोड़ी देर बाद देखा सचिन आया दरवाज़े के पास आकर बैठ गया| मैं तुरंत खड़ी हो गई और नहानें लगी|
लेकिन मेरे दिमाग में ये ख्याल भी था कि मेरा भाई मुझे नंगी नहाते हुए देख रहा था और इसलिए मैं ना केवल बाहर से नहा रही थी बल्कि अन्दर से भी बहुत गीली हो गई थी| आखिर मैंनें भी चूत में ऊँगली करके खुद को शांत किया|

उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को उस छेद से अपनी जवानी के जलवे दिखनें लगे| कभी कभी मैं बड़ी कामुक अदा से नहाती तो कभी अपनें नंगे शरीर से खेलती रहती| और वो भी यही सब करता था| लेकिन कभी ना उसकी हिम्मत हुई कि इस से आगे कुछ करे और ना मेरी हिम्मत हुई| समाज के ये सब जो कायदे हमें शुरू से सिखा दिए जाते हैं इसकी वजह से एक सीमा के बाद आगे बढ़ना मुश्किल लगता है| एक डर बैठा होता है दिल में कि अगर कुछ किया तो पता नहीं क्या होगा.
और इस से पहले कि हम दोनों में से कोई इस डर से मुक्ति पानें की कगार पर आता! मेरी शादी हो गई और मैं यहाँ आ गई|

चिंता:- वाह भाभी! वाह! क्या दिमाग पाया है| ये आईडिया मुझे क्यों नहीं आया| मैं बेकार कल्पना में ही भैया के लंड के बारे में सोच सोच के जैसे तैसे खुद को संतुष्ट किया करती थी|

:- अरे! लेकिन दिमाग से क्या होता है| किस्मत तो तुम्हारी ज्यादा अच्छी निकली ना| मुझे तो बस देखनें को मिलता था! तुम्हें तो चोदनें को मिल गया| और शायद तुम कल्पना में ज्यादा रहीं इसलिए तुम्हारे अन्दर दबी हुई भावनाएं ज्यादा थीं इसीलिए शायद आज तुमनें कायदों को ताक पर रख दिया. मुझे कुछ हद तक संतुष्टि मिल जाया करती थी इसलिए कभी ज्यादा हिम्मत नहीं कर पाई.

रीता की शक्ल देख कर मुझे उस पर तरस आ गया और मैंनें बोल दिया:- यार तुम फिकर ना करो! तुमनें हम दोनों भाई बहन की चुदाई में मदद की है तो हमारा भी फ़र्ज़ बनता है कि हम तुमको तुम्हारे भाई से चुदवानें में मदद करें|
रीता की तो जैसे लाटरी लग गई हो! वो तुरंत ख़ुशी से उठ कर बैठ गई और और कहनें लगी:- वाओ! सच! मगर कैसे? और सचिन मुझे चोदना चाहेगा या नहीं?
अंकेश:- अरे बाबा इतना टेंशन ना लो| देखो तुमनें खुद बोला ना कि समाज के डर से तुम्हारी हिम्मत नहीं हुई लेकिन अब तो तुम अकेली नहीं हो ना| हम भी तुम्हारे साथ हैं| जैसे आज तुमनें हमें चुदाई के लिए प्रोत्साहित किया वैसे हम भी तुम दोनों भाई बहन की चुदाई के लिए सही माहोल बनानें में मदद करेंगे| तुम वो सब चिंता अभी से ना करो! कुछ ना कुछ प्लान तो बन ही जाएगा|

चिंता:- हाँ भाभी! हम आपको आपके भाई से ज़रूर चुदवाएंगे लेकिन अभी तो आप हम दोनों भाई बहन की चुदाई की चीअर लीडर बनो|
इतना कह कर चिंता भी उठ कर बैठ गई और मेरा लौड़ा! जो उसनें अब तक सहला सहला के कड़क कर दिया था उसको! अपनी चूत पर सेट करनें लगी| रीता भी ख़ुशी में हम दोनों को प्रोत्साहित करनें लगी|

रीता:- हाँ हाँ क्यों नहीं मेरे भेनचोद पति की चुदक्कड़ बहन! जितना चुदवाना है चुदवा| अपनें भाई के लंड पर बैठ कर घुड़सवारी कर| और अंकेश तुम भी चलाओ अपना लंड इसकी चूत में जैसे इंजन में पिस्टन चलता है| बुझा दो इसकी चूत की आग अपनें लंड के पानी से|

रीता की बातें हमारी उत्तेजना और बढ़ा रही थीं और मेरी बहन मेरा लंड अपनी चूत में लिए उसके ऊपर उछल रही थी| मैं भी नीचे से उसका साथ दे रहा था और साथ ही दोनों हाथों से उसके चूचे भी मसल रहा था|
इस तरह हम तीनों नें मिल कर रात भर चुदाई की|
एक बार तो वो दोनों 69 की पोजीशन में एक दूसरी की चूत का दाना चूस रहीं थीं और मैं बारी बारे दोनों की चूत चोद रहा था| दोनों नें मिल कर कई बार मेरा लंड भी चूसा और एक बार तो दोनों में होड़ लगी थी कि मैं किसके मुँह में झडूंगा|

ऐसे ही मस्ती करते करते वो रात तो निकल गई और फिर अगले दिन से हम रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में व्यस्त हो गए| चिंता अब हम दोनों के साथ ही सोनें लगी थी और हम सब मिल कर सेक्स किया करते थे

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