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“अपनी सगी कुंवारी बहन की चुदाई की होली के दिन”-4

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अब तक आपनें पढ़ा कि योजना के अनुसार सबसे पहले चिंता सचिन चुदवानें वाली थी| रीता और सचिन फ़ोन पर इशारों इशारों में काफी सेक्सी बातें करनें लगे थे और रीता को समझ आ गया था कि सचिन अपनी मम्मी को नंगे नहाते हुए देख रहा था| इसी बात से प्रेरित होकर पंकज! रीता और चिंता नें एक रोल प्ले किया था| सचिन के आनें तक ऐसे ही दिन काटते रहे|
अब आगे…

अगले दिन सचिन आनें वाला था और कम से कम कुछ दिनों के लिए घर का माहौल बदलनें वाला था| अब न तो कोई सारा समय नंगे रह पाएगा और न ही जब मनचाहे ढंग से चुदाई हो पाएगी| पंकज! चिंता और रीता नें आपस में सलाह करके पूरी योजना तैयार कर ली और फिर सारी रात जम के चुदाई की ताकि अगले आनें वाले कुछ दिनों में खुद पर नियंत्रण रखना आसान हो जाए
खास तौर पर पंकज नें सबसे ज़्यादा चिंता को चोदा क्योंकि रीता तो फिर भी मिल सकती थी लेकिन सचिन के रहते चिंता की चूत मिलना थोड़ा मुश्किल होता|

देर रात तक तरह तरह से चोदनें के बाद आखिर सब थक गए|
पंकज:- अब नहीं होगा मुझसे! बहुत थक गया हूँ|
रीता:- तीन बार अपनी बहन चोद चुके हो और दो बार मुझे| आदमी हो कोई खरगोश नहीं कि बस चुदाई ही करते रहो|
चिंता:- हाँ! और ऐसा भी नहीं कि अब मैं कभी मिलनें वाली नहीं हूँ| भाभी को तो रात में चोद ही सकते हो और मैं भी 4:-6 दिन में मिल ही जाऊँगी| तब तो भाभी सारा टाइम अपनें भाई से ही चुदवानें वाली हैं तो आपको मेरी ही चूत नसीब होगी|
रीता:- तेरे मुँह में घी:-शक्कर!
और इतना कह कर रीता नें नें चिंता को चूम लिया| इस बात पर सब हंसनें लगे और फिर सब सो गए|

अगला दिन एक नया सवेरा ले कर आनें वाला था|
सुबह उठनें के बाद सबनें फ्रेश होकर नाश्ता किया और फिर तीनों नें गोला बना कर एक साथ एक दूसरे को गले लगाया (जैसा फुटबॉल के खिलाड़ी अक्सर करते हैं)| उन्होंनें वादा किया कि वो पूरी कोशिश करेंगे कि अगली बार जब वो इस तरह गले मिलें तो सचिन भी उनके साथ हो|

उसके बाद पंकज तैयार होकर क्लीनिक चला गया| चिंता नें आज कॉलेज से बंक मार दी क्योंकि वो अपनी भाभी के साथ सचिन को लेनें स्टेशन जानें वाली थी|

दोनों नें मिल कर घर सजाया! जो कुशन और गद्दे! सेक्स की सहूलियत के लिए इधर उधर बिखरे पड़े थे उनको अपनी जगह पर रखा गया| सहूलियत के लिए जो 1:-2 कंडोम के डब्बे हर कमरे में पड़े हुए थे! उनको वापस छिपा कर रख दिया गया| टीवी के पास जो चुदाई के वीडियो की सीडी/डीवीडी का ढेर था! उसे भी छिपा कर उसकी जगह बॉलीवुड के सेक्सी गीतों और फिल्मों की डीवीडी रख दी गईं|

तब तक ट्रेन के आनें का समय भी होनें लगा था तो दोनों ननद:-भौजाई जल्दी से तैयार होकर रेलवे स्टेशन की तरफ चल दीं| कार रीता चला रही थी और चिंता उसके मज़े ले रही थी|
चिंता:- क्या भाभी! बड़ी जल्दी हो रही है अपनें भाई से मिलनें की| आपको देख कर तो ऐसा लग रहा है कि आपसे सब्र नहीं होना| मुझे तो लगता है वहीं स्टेशन पर ही कोई रूम बुक करवाना पड़ेगा आप दोनों के लिए|
रीता:- रहनें दे… रहनें दे| खुद के मन में लड्डू फूट रहे हैं! मुझे बोल रही है|
चिंता:- मेरे मन में क्यों लड्डू फूटेंगे?
रीता:- पहले तो तू ही चुदवानें वाली है न उस से| नए लंड के बारे में सोच सोच के चूत में गुदगुदी हो रही होगी इसलिए मेरा नाम ले ले कर ये सब बोल रही है|
चिंता:- भाभी आप भी न… बड़ी वो हो|

इतनें में स्टेशन आ गया और गाड़ी पार्क कर के दोनों गेट की तरफ बढ़ गईं|

थोड़ी ही देर में सचिन आता हुआ दिखाई दिया| उसनें अपना हाथ लहरा के इशारा किया इधर रीता नें भी अपना हाथ हवा में हिला कर हेलो वाला इशारा किया| चिंता नें पहली बार उसे इस नज़र से देखा था! वो मंत्रमुग्ध सी देखती ही रह गई|
शादी में तो वो इतना व्यस्त था कि खुद कैसा दिख रहा है उसका होश ही नहीं था| बहन की शादी में भाई के पास कहाँ समय होता है सजनें धजनें का|

जैसे ही वो पास आया! रीता नें उसे गले से लगा लिया! शादी के पहले उसनें कभी ऐसा नहीं किया था| एक तो शादी के पहले लड़कियां होती ही हैं थोड़ी रिज़र्व टाइप की और ऊपर से इनके बीच जिस तरह का आकर्षण था! उसके चलते रीता को लगता था कि अगर वो सचिन के ज़्यादा पास गई तो कहीं कुछ कर न बैठे| लेकिन आज न उसे कोई झिझक थी न कोई डर! इसलिए वो दिल खोल कर अपनें भाई से गले मिल रही थी|

सचिन की तो हालत ख़राब हो गई थी! जिस बहन को वो छिप छिप कर नंगी देखा करता था! आज वो उसकी बांहों में थी| उसके वो कोमल उरोज जिनको वो हमेशा छूना चाहता था! वो आज उसकी छाती से चिपके हुए थे| उसनें भी रीता को अपनी बाँहों में जकड़ लिया था| दिल तो किया कि हथेलियों को पीठ से नीचे सरका कर नितम्बों को सहला दे लेकिन उसके हाथ कमर से आगे न जा पाए| हिम्मत ही नहीं हुई बावजूद इसके कि फ़ोन पर दोनों बहुत खुल गए थे! असली में जब सामनें आते हैं तो बात कुछ और हो जाती हैं|

इनको देख कर चिंता भी बड़ी उत्तेजित हो गई थी! उसे लगा अब उसकी बारी है तो जैसे ही सचिन रीता से अलग हुआ और रीता नें कहा:- ये मेरी ननद चिंता!
सचिन नें हाथ मिलानें के लिए हाथ बढ़ाया और चिंता नें गले मिलनें के लिए दोनों हाथ| फिर अचानक से सचिन का हाथ देख कर उसे होश आया और उसनें भी हाथ मिला लिया|
इस बात से रीता को बड़ी हंसी आई लेकिन उसनें हंसी छिपा ली|
लेकिन सारे रास्ते जब भी उसकी नज़रें चिंता से मिलतीं वो मुस्कुरा देती और चिंता मन मसोस कर रह जाती|

रास्ते भर इधर उधर की बातें होती रहीं जैसे घर पर सब कैसे हैं वगैरा वगैरा|

घर पहुंच कर रीता नें सचिन को कहा कि वो नहा ले फिर सब खाना खा लेंगे|
सचिन:- नहानें के लिए ही तो आया हूँ मैं यहाँ|
रीता नें एक बड़ी सी मुस्कराहट के साथ उसे बाथरूम का दरवाज़ा दिखाया और किचन में चली गई|

सचिन नें देखा वो काफी बड़ा बाथरूम था| आम घरों में जितनें बड़े साधारण कमरे होते हैं उतना बड़ा| दरवाज़ा उसके एक कोनें में था| दरवाज़े के ठीक सामनें वाले कोनें में पर्दा लगा हुआ था जिसके पीछे एक बड़ा सा तिकोना बाथ टब था| उसके सामनें के कोनें में चमचमाता हुआ हाई:-टेक कमोड था| इन दोनों के सामनें और दरवाज़े से लगी हुई दीवार पर एक बड़ा पूरी दीवार के साइज का दर्पण था और एक बड़ा सिंक जो ग्रेनाइट के प्लेटफॉर्म में फिट था|

बाथ टब का बाहरी हिस्सा गोल था (पिज़्ज़ा के बड़े टुकड़े जैसा)| उसके अंदर ३ कोनों पर बैठनें की जगह दी हुई थी लेकिन जितना बड़ा वो था उसमें 4:-5 लोग आराम से बैठ सकते थे| अंदर तरह तरह की लाइट्स और शॉवर्स लगे हुए थे जिनकी सेटिंग के लिए एक पैनल भी था| इसके चारों ओर फाइबर का पारदर्शी गोल कवर था जो आधा स्लाइड हो कर दरवाज़े का काम करता था और इसके चारों ओर एक सुन्दर पर्दा लगा हुआ था ताकि अगर कोई टॉयलेट या सिंक का प्रयोग करना चाहे तो नहानें वाले को न देख सके|

ये सब देख कर सचिन के मुँह से अपनें आप ‘वाओ’ निकल गया| वो नहाते नहाते सोचनें लगा कि दीदी की तो ऐश है| लेकिन एक बात उसे दुखी कर रही थी कि यहाँ अगर वो बाथरूम के दरवाज़े में छेद कर भी ले तो पता नहीं रीता को नहाते हुए देख पाएगा या नहीं क्योंकि अंदर एक पर्दा और भी था|

आखिर उसनें उन सब नए नए उपकरणों के साथ छेड़खानी करते हुए सारी सेटिंग्स आज़मा कर देखीं और बहुत देर तक नहानें के बाद जब वो बाथरूम से बहार निकला तो चिंता वहीं सामनें खड़ी थी|
चिंता गुस्से में:- क्या यार नहानें के लिए दरवाज़ा बंद करनें की क्या जरूरत थी|
इतना कह के वो अंदर चली गई और दरवाज़ा बंद कर लिया|

सचिन कुछ समझ नहीं पाया कि हुआ क्या था| वो किचन में रीता के पास गया और जब उसनें पूछा कि ये सब क्या था तब रीता नें उसे समझाया|
रीता:- देखो! बाथ टब के चारों तरफ तो परदा है न… तो नहानें के लिए दरवाज़ा बंद नहीं करते ताकि किसी को टॉयलेट या सिंक यूज़ करना को तो कर सके| बेचारी चिंता को कब से पेशाब आ रही थी लेकिन तुम्हारे चक्कर में रोक कर खड़ी थी| इसलिए गुस्सा हो रही थी| अब समझे?
सचिन:- और किसी नें पर्दा हटा दिया तो?
इतना कह कर सचिन नें धीरे से आंख मार दी|
रीता:- तो पर्दा हटानें वाला भी तो दिखाई देगा न|
रीता नें एक शैतानी सी मुस्कराहट बिखेरते हुए कहा|

खाना तैयार था सब जा कर खानें के टेबल पर बैठ गए और खाना खानें लगे|

सचिन:- माफ़ करना चिंता! मेरे कारण तुमको तकलीफ उठानी पड़ी| मुझे पता नहीं था कि यहाँ का क्या सिस्टम है|
चिंता:- कोई बात नहीं यार! वो तो उस समय मुझे ज़ोर की लगी थी इसलिए गुस्से में बोल दिया था लेकिन तुम दिल पर मत लेना| ठीक है?
सचिन मन में ‘दिल पर लेना ही होगा तो तेरे इन दोनों चाँद के टुकड़ों को लूँगा न जानेंमन|’

खाना खानें के बाद तीनों मिल कर गप्पें लड़नें लगे| चुटकुले:-कहानियां चल रहे थे कि तभी बातों बातों में चिंता नें कहा:- पता है भाभी! कल मेरे कॉलेज में हॉस्टल की लड़कियों नें एक जोक सुनाया| एक हॉस्टल में सुबह 6 से 7 का समय जिम का था और अक्सर लड़कियां उस टाइम में साइकिल चलाती थीं|
एक दिन 7 बजे एक लड़की हांफती हुई जिम वाली मैडम के पास आई और बोली:- मैडम दस मिनट और साइकिल चला लूँ?
मैडम बोली:- ठीक है! लेकिन आगे से ध्यान रखना सात बजे के बाद नहीं|
लेकिन कोई न कोई लड़की रोज़ ऐसा पूछती थी|
एक दिन गुस्से में मैडम चिल्लाई:- आज के बाद किसी से एक मिनट भी ज़्यादा माँगा तो सबकी साइकिल में सीट लगवा दूँगी.

इतना सुनते ही रीता ज़ोर से हंसी और चिंता के हाथ से हाथ टकरा कर हाय किया| दोनों पेट पकड़ कर हंस रहीं थीं और सचिन के कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा था|
आखिर उस से रहा नहीं गया और उसनें पूछ लिया कि इसका क्या मतलब हुआ?
रीता:- अरे मेरे लल्लू… साइकिल में सीट नहीं होगी तो क्या होगा? डंडा ! अब समझ आया?
सचिन:- ओह्ह तो ये बात थी| अब यार मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि चिंता ऐसा जोक सुना सकती है| और लल्लू किसको बोला? आप इतनें ही चालू हो तो ये सवाल का जवाब दो?
तीन लड़कियां कुल्फी खा रहीं हैं| एक पिघला के खा रही है एक चूस के खा रही है और एक काट के खा रही है तो तीनों में से कौन शादीशुदा है?
बताओ?
रीता:- सिंपल है यार जो चूस के (आँख मारते हुए) खा रही है वो शादीशुदा है|
चिंता:- वैसे तो भाभी! चूस के खानें वाली भी कोई ज़रूरी नहीं है कि शादीशुदा ही हो. लेकिन क्या है न कि अपनें सचिन को उससे ऐसी ‘उम्मीद’ नहीं होगी| हा हा हा…

दोनों फिर पेट पाकर कर ज़ोर ज़ोर से हंसनें लगीं| सचिन का तो पोपट हो गया था लेकिन वो न केवल अब उन दोनों से साथ ज़्यादा खुल गया था बल्कि उसके मन में चिंता के लिए आकर्षण भी पैदा होनें लगा था|
रीता से तो उसे कोई खास उम्मीद नहीं थी क्योंकि वो दीदी थी लेकिन अब उसका मन होनें लगा था कि अगर मौका मिले तो वो चिंता को चोद दे| लेकिन अब तक की बातों से तो कोई भी समझ सकता है कि दुनिया सचिन की ‘उम्मीदों’ से कहीं आगे जा चुकी है|

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