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“अपनी सगी कुंवारी बहन की चुदाई की होली के दिन”-1

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मेरी बहन की चुदाई बात तब की है जब मैं अपनी बीवी और छोटी बहन चिंता के साथ दिल्ली में रहता था। मैं एक 26 वर्षीय डाक्टर हूँ। मेरे घर में मेरी बीवी 22 साल कद 5 फुट 5 इंच और मेरी 18 वर्षीया बहन चिंता कद 5 फुट 7 इंच ही रहते हैं। मेरे पापा और मम्मी गाँव में रहते हैं। पढ़ाई की वजह से मेरी बहन चिंता भी मेरे साथ दिल्ली रहनें को आ गई थी।

जब तक वो गाँव में थी तो दुबली पतली लम्बी सी सामान्य सी लड़की थी लेकिन शहर आनें के बाद तो उसका रंग रूप ही बदल गया। मेरी बहन चिंता अब एक भरे पूरे बदन की मस्त लड़की बन गई थी। चिंता की चूचियाँ 34 इन्च और कूल्हे यानि चूतड़ 38 इन्च के हो गए थे। शहर आनें के बाद वो अक्सर स्कर्ट टॉप या जींस ही पहनती थी।

हमारी भी नई नई शादी हुई थी और हमारा मकान दो कमरे का था, एक कमरे में मैं और मेरी बीवी तथा दूसरे कमरे में मेरी बहन सोती थी।

बात पिछली होली की है, छुट्टियाँ न मिलनें की वजह से हम लोगों नें होली यहीं मनानें का फैसला किया। होली की सुबह सोते में ही मेरी बीवी नें मेरे मुँह पर रंग लगा दिया, जब मैं सो कर उठा तो मेरी बहन और बीवी मुझे देख कर हंसनें लगी तो मैंनें भी अपनी बहन और बीवी के मुँह पर रंग लगा दिया।

मेरी बीवी नें तो आराम से रंग लगवा लिया पर मेरी बहन नें थोड़ी ना नुकर की, उसी जोर जबरदस्ती में मेरी बहन की चूचियाँ मेरे हाथों में आ गई। मैंनें भी मौके का फायदा उठाया और अपनी बहन की चूचियाँ दबा दी। फिर वो मुझसे छुड़ा कर भाग गई।

थोड़ी देर में वो आई और मेरी बीवी से बोली:- भाभी, मैं पड़ोस में अपनी सहेलियों के साथ होली खेलनें जा रही हूँ!

और चली गई। फिर हम पति पत्नी आपस में होली खेलनें लगे। मैंनें अपनी बीवी के पूरे बदन पर, खास कर चूचियों पर रंग लगाया और उसनें मेरे लंड पर रंग लगाया।

फिर हम दोनों ड्रिंक करनें लगे।

जब हमारे दो दो पैग हो गए तभी मेरी बहन नें दरवाजा खटखटाया। मेरी बीवी अन्दर थी, मैंनें जाकर दरवाजा खोला।

दरवाजा खोलते ही मेरे होश उड़ गए, मेरी बहन स्कर्ट और टीशर्ट में पूरी भीगी खड़ी थी, उसकी चूचियों की नोक तक नजर आ रही थी। मैं तो देखता ही रह गया और जब वो अन्दर जानें लगी तो उसकी भरी:-2 मतवाली फूली हुई गांड देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं अपनी सगी बहन चिंता को पेलनें की सोचनें लगा।

मैंनें योजना बनाई और उसे भी दो पैग शराब पिला दी।

तभी मेरी पत्नी वापस आई और बोली:- ननद खुशी, बाहर ही पूरा डलवा चुकी हो या घर में भी कुछ डलवाओगी?
तो मेरी बहन शरमा गई।

तभी मेरी बीवी नें उसे पकड़ लिया और उसके टॉप के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूचियों पर रंग लगा दिया।
चिंता गुस्सा हो गई और मुझसे बोली:- भैया, भाभी को पकड़ो, मैं भी रंग लगाऊँगी।

मैंनें मेरी बीवी के हाथ पकड़ लिए तो उसनें भी मेरी बीवी की ब्रा के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूचियों पर रंग लगा दिया और सब हंसनें लगे।

इतनें में उन दोनों नें इशारे इशारे में बात किया और मेरी बहन नें मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरी बीवी नें सामनें से मेरे अंडरवीयर में हाथ डाल कर मेरे लंड पर रंग लगानें लगी।

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मुझे भी गुस्सा आया, मैंनें भी मेरी बीवी को पकड़ लिया और उसके चूतड़ों पर रंग लगानें लगा। इतनें में मेरी बीवी के हाथ में अचानक मेरी बहन की स्कर्ट आ गई और उसनें उसे खींच दिया।

अब मेरी बहन सिर्फ टीशर्ट और पेंटी में थी, उसकी केले जैसी जांघें और भीगी होनें की वजह से मेरी बहन की फूली हुई बुर की फांक भी नजर आनें लगी। मेरी बहन चिल्लाई तो मैंनें मेरी बीवी की टीशर्ट खींच कर उतार दी। तब मेरी बहन हंसनें लगी।

इतनें में मेरी बहन नें मुझे पकड़ लिया तो मेरी बीवी नें मेरा अंडरवीयर भी खींच कर उतार दिया और वो दोनों हंसनें लगी।

मेरी नजर मेरी बहन के चूतड़ों पर थी, मैंनें मेरी बहन को पकड़ा और उसकी गांड पर रंग लगानें लगा। अब सब लोग पूरे नशे में आ गए थे। मेरी बहन नें मेरी बीवी की पेंटी उतार दी।

जब मेरी बहन मेरी बीवी की पेंटी उतार रही थी, तभी मुझे मौका लगा और मैंनें मेरी बहन की फ़ूली हुई बुर को भी सहला दिया तो मेरी बहन चिंहुक गई और भागनें लगी लेकिन मेरी बीवी नें उसे पकड़ लिया और बोली:- कहाँ भाग रही हो?

तब मैंनें मेरी बहन की चूचियों, चूतड़ों, कूल्हों, बुर और गांड पर खूब रंग लगाया। तभी दोनों नें मुझे पकड़ लिया और मेरी बहन नें मेरा लंड पकड़ लिया और उस पर रंग लगानें लगी।

तभी मेरी बीवी नें मेरे लण्ड पर मग भर कर पानी डाला और उसे अपनें मुँह में ले लिया और चूसनें लगी। तब मैं चिंता की बुर को सहला रहा था।

फिर मैंनें मेरी बहन को उठा कर जमीन पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसे रगड़नें लगा।

तब उसे होश आया तो वो कहनें लगी:- नहीं, छोड़ दो भैया!

लेकिन मैंनें उसे छोड़ा नहीं और उसकी चूचियों को मुँह में लेकर चूसनें लगा और एक हाथ से उसकी बुर सहला रहा था।

थोड़ी देर में वो भी साथ देनें लगी और मुझे अपनी बाँहों में भर लिया तभी मैंनें अपनें लौड़े का निशाना अपनी सगी कुंवारी बहन की बुर पर लगाया और एक ही झटके में पूरा लिंग अपनी बहन की बुर में पेल दिया।

मेरी बहन चिंता पूरा चिंगुर गई और रोनें लगी। मेरी बहन चिंता की बुर फट गई थी तथा वो मुझे अपनें ऊपर से हटानें लगी पर मैं कहा माननें वाला था, मैं उसे रगड़ता रहा और हुमच हुमच कर अपनी बहन की चुदाई करता रहा। मेरी बीवी शराब के नशे में भाई बहन को चुदाई करते देख कर हंसे जा रही थी।

थोड़ी देर बाद चिंता को भी मजा आनें लगा और मेरी बहन भी नीचे से गांड उछाल कर अपनें भैया से चुदवानें लगी। मजे की बात मेरी बीवी हमारे पास बैठी मजे ले रही थी।

दस मिनट चोदनें के बाद मैं अपनी बहन की बुर में ही झड़ गया। फिर हम लोग उठे और तीनों एक साथ नंगे नहाए।

वहाँ बाथरूम में भी मैंनें चिंता बहन की चुदाई एक बार और की जिसमें मेरी बीवी नें भी पूरा साथ दिया।

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