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अठरह की उम्र में लगा चस्का

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दोस्तो, मैं हूँ निशा, उम्र अभी सिर्फ इकीस साल की है शादी शुदा हूँ।

अन्तर्वासना पर लोगों की चुदाई पढ़ पढ़ मेरी भी फुद्दी गीली हुए बिना नहीं रहती। मैं दिन भर अकेली रहती हूँ, मैं पहले से चुदाई की दीवानी थी शादी के बाद यह आग और भड़कनें लगी है।

मेरे पति मुझसे कई साल बड़े हैं हमारी लव मैरज हुई थी, मेरी मुलाक़ात इनसे तब हुई जब बारहवीं में मैंनें गारमेंट डिज़ाइनिंग का विषय लिया था।

फ़ाईनल पेपरों के बाद हमारी ऑन जॉब ट्रेनिंग लगती है जो सभी को करनी पड़ती है, ग्रुप में बाँट कर भेजा जाता है।
मेरी ट्रेनिंग लगी गुप्ता टेक्सटाईल में !

मैं सेक्स-बम थी, कई लड़कों से चुदाई कर चुकी थी, मैं साधारण से घर से थी, शुरु से ही मैंनें अपनें अरमान अमीर लड़कों को फांस कर पूरे किये थे।

जब वहाँ के मालिक गुप्ता जी नें जब यह पूछनें के लिए कि भविष्य में क्या करनें का इरादा है, हरेक को एक एक कर ऑफिस में बुलाया तो उस दिन मैंनें काले रंग का गहरे गले का सूट पहना था, पटिला सलवार, चुन्नी गले से लगाई हुई थी, क्लीवेज शो सामनें था।

गुप्ता जी नें पहली बार ही मुझे देखा, बैठनें को कहा, उनकी नज़र मेरे गहरे गले में बन रही खाई पर फिसल जाती, मुझसे फाइल मांगी सामनें खड़ी हुई फाइल देनें के लिए आगे तरफ हाथ बढ़ाया, मेरी पूरी फिल्म उन्होंनें देख ली।

वो लालची नज़रों से देख रहे थे, मैं भी मुस्कुरा दी, बेहद नशीली नज़रों से उनको देखा, मैं तो खेली-खाई थी।
हमारी ट्रेनिंग पच्चीस दिन की थी, पहली ही मुलाकात में मैंनें उनको सेंटी कर दिया था।

अगले दिन जब वहाँ गई ,मैंनें टाईट सूट सलवार जिसमें मेरे गोल गोल चूतड़ बाहर की तरफ उभरे हुए थे, पहना था। गुप्ता जी नें मुझे अपनें केबिन में बुलाया, पहले ट्रेनिंग की कुछ बातें की, मैं जानती थी कि वो मुझ पर सेंटी है, मैं कौन सी नई थी, कई लंड चूत में ले चुकी थी, मैं कुर्सी पर बैठी थी, वो उठे, ठीक मेरे पीछे खड़े हो गए, बोले- तुम तो बहुत सेक्सी कपड़े पहनती हो।

मेरे दोनों कंधो पर हाथ रख बोले- तुम अप्सरा हो, मुझे पहली नज़र में पसंद आ गई हो।
“सर ! आप बहुत बड़े हैं !”
“उसमें क्या दिल की चाहत मर जाती है?”

गला खुला था, उनका हाथ कंधों से अब आगे मेरी छातियों की तरफ बढ़नें लगा।
“यह क्या कर रहे हैं सर आप?”

गुप्ता जी नें मेरे दोनों मम्मों को दबा दिया निप्पल को चुटकी से मसला, मैं मस्त हो रही थी, प्यार से सहलाया, मैं अब गर्म होनें लगी।

उसनें मेरा कमीज़ उतरवा दिया, लाल ब्रा में कैद मेरे मम्मों को देख उनका लंड खड़ा हो चुका था जो मेरे गर्दन के करीब था, साफ़ उभरा हुआ दिख रहा था। उसनें छाती से हाथ नीचे लेजाते हुए मेरा नाड़ा खोल चड्डी में हाथ घुसा दिया, मेरी गीली हो रही चूत पर जब उनकी उँगलियाँ रगड़ी, मैंनें फुर्तीले सांप की तरह से घूम पैंट के ऊपर से उनका लंड दाँतों से दबा लिया।

“क्या हुआ डार्लिंग?”
“सर, मुझे नहीं पता क्या हुआ, मैं कौन सा यह सब करती हूँ, कुदरती ना जानें अपनें आप कैसे हो गया।”

उन्होंनें जिप खोल दी, मेरी आँखों के सामनें वो सीन घूमनें लगा जब आकाश नें मेरा शील भंग किया था, वो कमरा याद आ गया जब पहली बार मैं कॉलेज़ से फूट कर आकाश से मिलनें गई, वो मुझे अपनें दोस्त के कमरे में ले गया था। पहली बार किसी लड़के नें मेरे कपडे उतारे थे, तब मेरे मम्मे भी कोरे थे।
पहली बार था।

उसका सात इंच का लंड जिसके बारे तब मुझे रत्ती भर जानकारी नहीं थी, उसनें मुझसे लंड चुसवाया था और टाँगे उठवा जब उसनें लंड डाला था, मैं चिल्लानें लगी थी, खून देख कर मैं डर गई थी लेकिन उसके बाद जब मंजिल की तरफ कदम बढ़े थे तो ऐसा आनन्द आया था कि मैं उस आनन्द की दीवानी हो गई, उस मजे की कायल हो गई।
उस दिन दो बार मैंनें चुदवाया था।

मैंनें जिससे दिल लगाया, वे सब मुझसे बड़े ही थे, आकाश जब तक था, मैं सिर्फ उसी की थी, वो पढ़नें ऑस्ट्रेलिया चला गया था, मुझसे वहाँ बुलानें का कहकर।

कुछ दिन निकले, बबलू, जिसके कमरे में वो मुझे लेकर जाता था, वो सब जानता था, चाहकर भी मैं वफ़ा न कमा पाई, बबलू से ही दिल लगा लिया, अब उसके कमरे में उससे चुदनें गई, उसका बड़ा लंड मेरी जिस्म की प्यास बुझानें लगा, मुझे चुदाई की मलाई खानें का चस्का पड़ गया, देखते ही मेरा जिस्म पूरे शवाब पर आ गया, मुझे देख हर लड़का मचलनें लगा, मेरी छाती ख़ास करके लड़कों को पागल कर देती है।

मेरी सेक्स की भूख इतनी बढ़ गई थी कि एक दिन मैं एक साथ तीन लड़कों के साथ बंद कमरे में पूरा दिन रही थी, बबलू का भाई अमेरिका से कुछ दिनों के लिए परिवार के साथ आया था, मेरी चूत में आग लगी रहती है।

उसनें मुझे कहा कि उसके दोस्त का घर खाली है, कहो तो चल सकते हैं।
मैंनें कहा- ठीक है।

मैं उसकी बताई जगह पर पहुँच गई, जहाँ से बबलू नें मुझे अपनी बाईक पर बिठाया, जब वहाँ पहुँचे तो एक बहुत हैण्डसम लड़के नें दरवाज़ा खोला, हमें अंदर घुसवा जल्दी से दरवाज़े को बंद कर दिया।

हम बैठे बियर डकार रहे थे कि एक और लड़का आया, बाथरूम से निकला था नहा कर, उसनें तौलिया लपेट रखा था, उसका चौड़ा सीना जिस पर घनें बाल थे, देखनें में ही एक पूरा मर्द था। उसको देख मेरा तन मचलनें सा लगा।
“बहुत खूबसूरत हो !” वो बोला।
मैं मुस्कुरा दी, वो मेरे करीब आया

उसनें मुझे कहा कि उसके दोस्त का घर खाली है, कहो तो चल सकते हैं।
मैंनें कहा- ठीक है।

मैं उसकी बताई जगह पर पहुँच गई, जहाँ से बबलू नें मुझे अपनी बाईक पर बिठाया, जब वहाँ पहुँचे तो एक बहुत हैण्डसम लड़के नें दरवाज़ा खोला, हमें अंदर घुसवा जल्दी से दरवाज़े को बंद कर दिया।

हम बैठे बियर डकार रहे थे कि एक और लड़का आया, बाथरूम से निकला था नहा कर, उसनें तौलिया लपेट रखा था, उसका चौड़ा सीना जिस पर घनें बाल थे, देखनें में ही एक पूरा मर्द था। उसको देख मेरा तन मचलनें सा लगा।
“बहुत खूबसूरत हो !” वो बोला।
मैं मुस्कुरा दी, वो मेरे करीब आया… मेरे कन्धों पर हाथ रखते हुए बोला- क्या मम्मे हैं तेरे !

दोनों हाथों से पकड़ उसनें दबा डाले, मैं पागल सी होनें लगी थी, उसनें मेरे कमीज में हाथ घुसा कर मेरे मम्मे दबाये तो मेरा दिमाग घूम गया, मैंनें तौलिये के ऊपर से ही में उसका लंड पकड़ लिया।
हाय ! बहुत बड़ा था उसका लौड़ा !

उसनें एक झटके में मेरी कमीज़ उतारी, मेरी सलवार का नाड़ा खींच दिया, सलवार का नाड़ा फ़र्श चूमनें लगा।
इतनें में बबलू और रॉबिन नें मुझे कहा- जानेंमन, हम भी हैं यहाँ !

उसनें चार मग में बियर डाली, जोर देनें पर मैंनें पी ली, मुझे नशा होनें लगा, मैंनें रॉकी की कमर से तौलिया खींच दिया, उसका सांप सा लंड मेरे सामनें था, मैंनें लण्ड को अपनें हाथ में पकड़ा और सहलानें लगी। तीनों लड़के नंगे हो गए, मैं भी नंगी हो गई, फिर पूरा दिन स्कूल के टाइम तक सेक्स का वो खेल खेला गया जिसको मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती, रंडी बन कर मैंनें उस दिन अपनें दोनों छेद चुदवाये थे।
खैर ये तो थे अपनें पति मिस्टर गुप्ता से मिलनें के पहले के कुछ लम्हें !

गुप्ता जी नें ऑफिस में ही अपनी जिप खोल दी और अपना लंड निकाल कर सहलाते हुए बोले- पकड़ न अपनी अमानत !
और सात-आठ इंच के लंड को मेरे हाथ में दे दिया।
“सर, बाहर सब क्या सोचेंगे? मैं मुफ्त में बदनाम हो जाऊँगी, सब आपसे मेरा नाम जोड़ कर छेड़ेंगे !”
“मैं तो तेरा नाम जिंदगी भर के लिए अपनें नाम से जोड़ दूँगा ! मैं तुझपे मर मिटा हूँ मेरी लाडो रानी, जल्दी से एक बार मुँह में लेकर चूस दे, सच में सर बहुत देर हो गई अंदर आई को !”
फ़िर बोला- सेक्सी ब्रा-पैंटी खरीदा कर !
“मैं किसी अमीर की लड़की नहीं हूँ सर !”

“यह सर-सर क्या है? गुप्ता हूँ तेरे लिए मैं !” उसनें दराज़ से नोटों की गड्डी निकाली, मुझे बिना गिनें पकड़ाई।”यह ले, सेक्सी कपड़े खरीदा कर ! मेरी जीवन संगनी बनना है तुझे ! अब जल्दी से मुँह में लेकर चूस दे !”
मैंनें उनके लंड को मुँह में डाल ही लिया, चूसनें लगी।
उनका पूरा मूड था मुझे चोदनें का !

मुझे पलट कर बिछे गलीचे पर पटक लिया, मेरी सलवार दुबारा खोल दी और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़नें लगे।

मैंनें देखा कि वो रुकनें वालों में से नहीं तो मैंनें अपनी जांघें ढीली कर दी, दोनों जांघों को फैला वो बीच में आकर जोर लगानें लगे। मैंनें सांसें खींच ली उन्होनेंं चूत पर रखा मैंनें खुद को हिला दिया, लंड फिसल गया।
बोले- लगता है मेहनत करनी पड़ेगी !
“गुप्ता जी, रहनें भी दो ना ! किसी और दिन यह सब कर लेना, मेरा पहली बार है दर्द होगा तो चीख निकल जाएगी, यहाँ ठीक नहीं रहेगा !”
“चल ठीक, कल मेरे घर चलेंगे, इसी बहानें तुझे तेरा होनें वाला घर दिखा दूँगा, अब जल्दी से मुँह खोल दे !”

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मैं चूसनें लगी, गुप्ता जी मेरे सर को पीछे से दबा कर जोर जोर से करनें लगे, एकदम से मेरे मुँह में उनका गर्म गर्म माल निकलनें लगा, मैंनें पूरा माल मजे से पी लिया, उनका पूरा लंड निचोड़ का बाहर निकाला लेकिन मुँह बनानें लगी- यह क्या था अजीब सा/ क्या निकला?
बोले- मेरा पानी निकला ! क्यूँ अच्छा नहीं लगा?
“कभी यह सब किया नहीं, इसलिए !”

मैंनें सोच लिया कि गुप्ता जी जैसा अमीर बंदा अगर मुझे पसंद करता है उम्र में क्या रखा है, देखा जाएगा आगे चलकर !

उन्होंनें मुझे बीस हज़ार रुपये पकड़ा दिए, मैंनें ऊपरी मन से मना किया।
“चल, कल सेक्सी ब्रा-पैंटी पहनकर आना, पार्लर से चिकनी होकर घर जाना, मजा आएगा सुहाग दिन मनानें का !”

पैसे बैग में रख निकली, सभी लड़कियाँ मुझे देख रही थी, अजीब अजीब तरह से मुस्कुरा कर- बन्नो, क्या-क्या हुआ?
“उसका दिल तुझपे आ गया?” सिम्मी बोली- कितनी देर लगाई उसनें !
“तुम भी ना ! क्या लगता है, मैं इतनी जल्दी उसको सौंप दूंगी क्या? देख सुन बबलू, रॉकी, रॉ्बिन को इसके बारे मत बताना !

अपनी चारों सहेलियों को मैंनें काफी पिलवाई, जाते जाते मैंनें सेक्सी ब्रा-पैंटी के दो सेट खरीद लिए, टांगों की वेक्सिंग करवाई।
छोटी उम्र में मैंनें खुद पर काबू नहीं रखा, अब अपनी शरीर की ज़रुरत काबू में नहीं रख पाती, चाह कर भी मुझसे बिना चुदाई रहा नहीं जाता, चाहे वो लौड़ा किसी नौकर का हो या किसी अमीर का, मुझे बस चाहिए ऐसा मर्द जो मुझे मसल कर हल्की करके बिस्तर से निकाले।

“तुम भी ना ! क्या लगता है, मैं इतनी जल्दी उसको सौंप दूंगी क्या? देख सुन बबलू, रॉकी, रॉ्बिन को इसके बारे मत बताना !
अपनी चारों सहेलियों को मैंनें काफी पिलवाई, जाते जाते मैंनें सेक्सी ब्रा-पैंटी के दो सेट खरीद लिए, टांगों की वेक्सिंग करवाई।

छोटी उम्र में मैंनें खुद पर काबू नहीं रखा, अब अपनी शरीर की ज़रुरत काबू में नहीं रख पाती, चाह कर भी मुझसे बिना चुदाई रहा नहीं जाता, चाहे वो लौड़ा किसी नौकर का हो या किसी अमीर का, मुझे बस चाहिए ऐसा मर्द जो मुझे मसल कर हल्की करके बिस्तर से निकाले।

जाते जाते मैंनें सेक्सी ब्रा-पैंटी के दो सेट खरीद लिए, टांगों की वेक्सिंग करवाई, अगले दिन गुप्ता जी के साथ उनके घर जाना था, सुबह सुबह मुझे रॉकी का मैसेज मिला, वह मुझसे मिलना चाहता था, सुबह सुबह अकेला था।

जब मैं उसके कमरे गई मुझे दबोच लिया, कपड़े खोलनें लगा, बोला- वाह, नई ब्रा, नई पैंटी? ओये होए, चिकनी हुई पड़ी है !
“क्यूँ? नहीं हो सकती?”
मेरे मम्मे चूसते हुए बोला- क्यूँ नहीं !
मेरी चूत रगड़ता हुआ बोला- आज तेरी मैं नहीं लूँगा !
“क्या मतलब तेरा?”
“निशा, मेरी जान, आज भाई को खुश कर दे !”
“कौन भाई?”
“यादव भाई ! और कौन !”
वहाँ का बदमाश था।
“देख रॉकी, मैं कोई नया बंदा अपनें ऊपर नहीं लिटानें वाली !”
“साली, नखरे मत कर ! मुझे भाई का उधार चुकाना है, अगर तुम उसके नीचे लेट लोगी वो सब माफ़ कर देगा !”

तभी हटटा-कट्टा सा काले रंग का यादव दूसरे कमरे से निकला।
“साली, नखरे मत करना ! अगर तीन तीन लड़कों के साथ एक वक़्त दे सकती है तो एक और हो जाएगा तो पहाड़ नहीं टूटेगा, अपनें आप से मजे दे दे, वरना तीन चार गुंडे बुलवा लूँगा !”

नंगी तो मैं लगभग थी ही, मुझे पकड़ चूमनें लगा उसनें जब अपना लंड निकाला, देख कर मेरी जान निकल गई, काले रंग का लंबा मोटा लंड देख मेरी हालत ही खराब होनें लगी, कैसे झेलूंगी इसका? इससे चुदनें के बाद अगर गुप्ता से चुदी उसको शक हो जाएगा, मैंनें उसको कहा- देखो वादा रहा, मैं वहाँ से जल्दी निकल आऊँगी, मेरी मजबूरी समझो, मैं कहीं शहर छोड़ कर भाग नहीं जाऊँगी।
वो बात मान गया।
“और हाँ, कंडोम खरीद कर रखना।” मैंनें उससे कहा।

मैं वहाँ से निकली कि गुप्ता नें मुझे फ़ोन पर कहा- कंपनी नहीं जाना, सिंधी कॉफ़ी हाउस में आ जा।

मैंनें ऑटो लिया, वहाँ से कॉफ़ी पी हम उनके घर चले गए। आलिशान बंगला था, उस वक़्त नौकरों के अलावा कोई नहीं था, सभी मुझे गौर से देख देख आँखें सेक रहे थे, मेरी कसी छाती, उभरी गांड !
“यह है हमारा कमरा दोनों का !”
क्या नर्म नर्म सा बिस्तर था, मुझे बाँहों में लेकर गुप्ता नें खूब चूमा, मेरा दाना कूदनें लगा, आलीशान कमरे में चुदनें की तमन्ना बढ़नें लगी, एक एक कर कपड़े उतरे, नयी ब्रा-पैंटी देख वो खुश था, मेरी चिकनी टांगें, चिकनी चूत देख गुप्ता जी का लंड खड़ा हो गया। वो भी सिर्फ चड्डी में थे, उठा कर वाशरूम ले गए, वहां झाग वाले पानी के टब में फेंक दिया खुद भी साथ आ गए।
मैंनें उनके लंड को मुठ में ले लिया सहलानें लगी।
बोले- अल्टा पलटी कर !
मेरे मुँह में उनका लंड था, उनकी जुबां मेरी चूत में घूम मुझे पागल करनें पर तुली थी।

वहां से निकल कमरे में ले जा कर उन्होंनें अपना लंड आखिर मेरी चूत में घुसा ही दिया, मैंनें अपनी सांस खींच ली, जाँघें भींच ली, उनका जोर लगवाया, लंड घुस गया लेकिन मेरे गर्म शरीर और गर्म चूत में उनका लंड ज्यादा खेल नहीं पाया, पिंघल गया।
मैंनें कोई शिकयत नहीं की।
उन्होंनें कहा- दोबारा खड़ा होगा अभी !
दूसरी बार उनका लंड पहले से कुछ समय ज्यादा चला, करीब सात आठ मिनट ! मेरा पानी निकलवा दिया था, मैंनें पूरी ख़ुशी जताई। दोनों बार पानी मेरे अंदर छोड़ा था, मैंनें कहा- अगर कुछ ऐसा वैसा रुक गया तो?
बोले- उससे पहले तुझे दुल्हन बना लूँगा !

उम्र ज्यादा थी लेकिन पैसा बहुत था, एक बारहवीं पास लड़की इतनें बड़े बिज़नस वाले की बीवी बन जाए, और क्या चाहिए।

गुप्ता से चुदाई में मुझे पूरी मंजिल नहीं मिली थी, मैं गुप्ता जी के घर से पूरी संतुष्ट नहीं होकर आई थी पर उसके लिए यादव का औज़ार अभी बाकी था।
वहाँ से सीधी रॉकी के कमरे में जाना पड़ा, शरीर भी चाहता था, मजबूरी भी थी।

यादव खुश हो गया, मैंनें उसके लंड को खुलकर चाटा-चूसा लेकिन वो झड़नें वालों में से नहीं था, मैं फिर से बेवफा हो गई।
रॉकी नें भी अपनी पैंट उतारी उसका लंड जो पहले मुझे सबसे बड़ा लगता था, वो यादव के सामनें कुछ भी नहीं था।
“वाह क्या मस्त चूसती है साली ! छिनाल रंडी ! तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊँगा !”

उसनें मुझे कहा- मेरी गोदी में लंड पर बैठ जा।
वैसा किया तो तकलीफ हुई लेकिन उसके सामनें कुछ कहना फर्क नहीं डालता था।
लेकिन जल्दी ही यादव का लंड मेरी चूत में मजे देनें लगा, मुझे घोड़ी बना लिया, रॉकी नें अपना लंड मेरे मुँह में दे रखा था, जब यादव की फौलादी मर्दानी जांघें मेरे चूतड़ों पर बजती, मुझे मानो स्वर्ग दिखनें लग जाता था।

उसकी दोनों गेंदें जब चूत पर बजती तब भी आनन्द आता।
उसनें मेरी गांड पर थूका और उंगली घुसा दी, फिर दूसरी, फिर तीसरी !
“यह सब क्या हो रहा है?”
बोले- दो लंड हैं, एक घुसेगा तो दूसरा बुरा मानेंगा !
“तेरा बहुत बड़ा है, मेरी फट जायेगी !”
“एक बार रानी, तुझे मालूम है जब तुझे चलती देखता हूँ तेरी गांड हिलती है, यह तेरे में आकर्षण है।”

उसनें सुपारे को गांड के छेद पर रखा, थोड़ा घुसाया, मेरी जान निकल गई, इतना बड़ा लौड़ा मैंनें अपनी गाण्ड में नहीं डलवाया था।
उसनें निकाला, रॉकी से बोला- तेल है घर में?

रॉकी नें बोतल लाकर दी, उसनें तेल लगाकर घुसाया, धीरे धीरे पूरा घुस गया, उसनें रफ़्तार पकड़ ली, वो झड़नें का नाम नहीं ले रहा था, इतना स्टेमिना था।

यादव नें निकाला तो रॉकी सीधा लेट गया, उसकी तरफ पीठ करके बैठ गई, मैं उछलनें लगी। मेरे मम्मे हिलते तो यादव नें मेरे मम्मे पकड़ लिए, रॉकी से रुकनें को कहा, वो गांड में डाले हुए था, यादव आगे से आकर मेरी चूत में घुसानें लगा।
“यह सब क्या है?”
“तेरी माँ की चूत साली ! रंडी को ऐसे ही ठोका जाता है !”
मैं चुदवाती हुई बोली- हरामजादो, मैं रंडी हूँ? मादरचोदो कुत्तो !
“साली, छिनाल, रंडी से कम कहाँ है, तीन तीन लड़कों के साथ बंद कमरे में लेटती है।”
“कुत्तो ! सालो ! अब ठोको, जोर जोर से मारो मेरी !”

रॉकी नीचे से चूतड़ उठा कर मेरी गाण्ड मारनें लगा, जल्दी उसनें मेरी गांड को गर्म गर्म वीर्य से भर दिया, यादव नें जोर जोर से करते हुए मेरी फ़ुद्दी को वीर्य से भर दिया।
हम तीनों नंगे हांफ रहे थे।
“साली, मस्त माल निकली तुम ! सही सुना था।”

कपड़े पहनें, वहाँ से निकली कंपनी के लिए !
छोटी उम्र में बड़े बड़े काम करवा रही थी, मेरे जिस्म की आग प्यास दिन-ब-दिन बढती जा रही थी।

कंपनी पहुँची, थोड़ी देर में मुझे अंदर बुलाया गया।
“जी !”
गुप्ता जी बोले- मेज के नीचे मेरा पैन गिर गया है, उठा दो !
मैं नीचे झुकी तो सामनें नाग देवता मुझे सलामी दे रहे थे, गुप्ता जी नें लंड निकाल रखा था, मैं कुतिया की तरह गई, पकड़ सहलानें लगी, मुँह में डालकर चूसनें लगी, लंड को चूस चूस मैंनें मलाई पूरी निकाली और पी गई।

“मजा आया सर?”
“बहुत मजा आया ! अब तेरे बिना रहना मुश्किल हो गया ! मेरी जान तुम नहीं जानती, मैं रात को जल्दी सोता हूँ कि जल्दी सुबह हो जाए, अब मैं तुझसे शादी करना चाहता हूँ, आज ही तेरे घर तेरा हाथ मांगनें चाचा-चाची को भेज रहा हूँ। मॉम-डैड तो ऑस्ट्रेलिया हैं, उनसे मैंनें कह दिया है कि मुझे लड़की पसंद आ गई है, बोले, रिश्ता पक्का कर, हम शादी करनें आ जाएँगे।

खैर मेरा रिश्ता लेकर मेरे घर आये, पहले तो मॉम डैड थोड़ा हैरान थे, चमचमाती कार हमारे घर में आई, सभी देख रहे थे।
मुझे बुलाया गया कि यह सब क्या माज़रा है?
मैंनें कह दिया कि मैं गुप्ता को चाहती हूँ।

मॉम मान गई लेकिन मेरी उम्र बहुत छोटी थी, लेकिन अब उनको क्या पता कि मेरा दाना रोज लंड के लिए फड़कता है लेकिन वो मना
नहीं कर सके, हफ्ते बाद ही शादी की तारीख तय करनें घर आ गये।
लेकिन पापा बौखला गए- इतनी जल्दी हम कैसे कर सकतें हैं?
तब उन्होंनें कहा कि पूरा इंतजाम हमारा होगा, आप बस कन्यादान करो।

शादी हुई, मैं अब मिसेज गुप्ता बन गई, ससुराल में इनके रिश्तेदार जल गए कि इतनी कमसिन लड़की उम्र में कम इसका रिश्ता कैसे हो गया, जलनें वालों में थे मेरे नंदोई जी, इनके कज़न, कुछ दोस्त जल उठे थे।

पहली रात हमारी फाईव स्टार होटल के सेक्सी स्वीट में बुक करवाई, यह रात हक़ से चोदनें के लिए थी, चोरी छिपे इधर उधर मिलनें के बजाए लाएसेंस वाली रात थी।

लहंगा पहनें मैं बैड पर बैठी थी, बिना किसी डर के एक एक कर इन्होंनें मुझे निर्वस्त्र कर दिया, एक एक अंग को चूमनें लगे।

पहले हम दोनों एक साथ नहानें गए फिर आकर काम शुरु हुआ, मैं मजे से उनका लंड चूस रही थी, उस रात हमनें तीन बार चुदाई का मजा लिया था।

दिन बीतनें लगे, हम दोनों खुश थे, बिज़नस में रम गए, हर रात को हमारा होता ज़रूर था लेकिन मेरी पूरी तस्सली नहीं हो पाती थी।

घर में काम तो कुछ करना नहीं होता था, हर काम के लिए नौकर थे, मैंनें खुद पर काफी काबू कर लिया था लेकिन अब यह काम के चलते कई बार शहर से बाहर जाते थे तो मेरी पूरी रात कैसे बीतती, यह मैं ही जानती हूँ।

Antarvasna

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